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विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा स्थगित
पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का उल्लेख करने को लेकर राहुल गांधी पर हुए विवाद के बाद विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन से लोकसभा में बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व सांसद सुरुपसिंह हिरया नाइक के निधन पर शोक प्रस्ताव पढ़ा। इसके बाद सदस्यों ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए मौन रखा।

इसके तुरंत बाद सदन प्रश्नकाल में प्रवेश कर गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के एक प्रशिक्षण संस्थान से जुड़े प्रश्न का उत्तर देना शुरू किया। हालांकि, विपक्षी सदस्यों के नारेबाजी शुरू करने के कारण वह अपना जवाब पूरा नहीं कर सके।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने व्यवधान पर चिंता जताई और सदस्यों से सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहा। परिणामस्वरूप, अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सोमवार के हंगामे का संबंध नरवणे की किताब विवाद से

यह व्यवधान सोमवार को लोकसभा में हुए हंगामे के बाद देखने को मिला। यह विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का उल्लेख किया, जैसा कि एचटी ने पहले रिपोर्ट किया था।

इस संदर्भ पर सत्तापक्ष की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई। गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तर्क दिया कि सदन में केवल औपचारिक रूप से प्रकाशित सामग्री का ही हवाला दिया जा सकता है।

हंगामे के कारण अध्यक्ष ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित की, फिर 4 बजे तक के लिए स्थगित किया और अंततः पूरे दिन के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।

नरवणे के संदर्भ पर क्यों हुआ विवाद

राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर बोलते हुए जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का उल्लेख किया। उन्होंने इस संदर्भ का उपयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर हमला करने के लिए करने की कोशिश की।

भाजपा नेताओं ने तुरंत आपत्ति जताई और गांधी पर सदन को गुमराह करने तथा सशस्त्र बलों का अपमान करने का आरोप लगाया।

इसके जवाब में गांधी ने कहा कि सरकार उस पंक्ति से डर रही है, जिसे वह उद्धृत करना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह यही मुद्दा राज्यसभा में भी उठाएंगे।

भाजपा ने उनके दावों का खंडन किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि गांधी ने संसद की गरिमा को ठेस पहुँचाई और भारतीय सैनिकों की भावनाओं को आहत किया। कई भाजपा सदस्यों ने उन पर “भारत-विरोधी तत्वों की भाषा बोलने” का आरोप लगाया।

अध्यक्ष ने राहुल गांधी को रोका

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को उस संदर्भ के साथ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

स्थिति बिगड़ने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की और बाद में पूरे दिन के लिए कार्यवाही रोक दी।

सदन के भीतर क्या हुआ

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देना चाहते हैं।

इसके बाद उन्होंने 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर नरवणे की कथित “आत्मकथा” से उद्धरण देने की कोशिश की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी आपत्ति जताई और पूछा कि क्या वह किताब प्रकाशित हुई है।

लगभग 50 मिनट तक हंगामा चलता रहा। अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार कहा कि सदन के कामकाज से असंबंधित किसी भी किताब या अखबार की कटिंग का हवाला नहीं दिया जा सकता। गांधी का कहना था कि दस्तावेज़ प्रमाणित है और उन्हें इसे उद्धृत करने का अधिकार है।

जब राजनाथ सिंह ने कहा कि किताब अप्रकाशित है, तो भाजपा नेता किरेन रिजिजू ने अध्यक्ष के फैसले का समर्थन किया और संसदीय नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की।

रिजिजू ने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष के नेता अध्यक्ष के आदेश के बावजूद आत्मकथा का हवाला देते रहे, तो सदन को उनके खिलाफ कार्रवाई पर विचार करना पड़ेगा।

बाद में सरकारी सूत्रों ने कहा कि गांधी चीन के मुद्दे पर “गढ़ी हुई बातें” पढ़ रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि चीन पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिए गए फैसलों से जुड़ी पर्याप्त सामग्री पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा कि नेहरू ने “अपनी राजनेतागिरी को आगे बढ़ाने के लिए हजारों एकड़ जमीन आत्मसमर्पण कर दी थी।”

राहुल गांधी ने अपने रुख का बचाव किया

शाम 4 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर राहुल गांधी ने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठा रहे थे।

उन्होंने दावा किया कि सरकार ने उन्हें इसलिए रोका क्योंकि किताब में 2020 के चीन संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और राजनाथ सिंह की आलोचना की गई है।

“यह रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री के लिए असहज है, मैं समझता हूँ। मैं राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानता हूँ। अगर यह असहज नहीं होता तो वे मुझे बोलने देते, लेकिन तथ्य यह है कि वे मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं, इससे स्पष्ट है कि वे असहज हैं,” गांधी ने कहा।

उन्होंने आगे कहा, “नरवणे जी ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह जी के बारे में साफ तौर पर लिखा है, जो एक लेख में प्रकाशित हुआ है, और मैं उसी लेख से उद्धरण दे रहा हूँ। वे डरे हुए हैं, क्योंकि अगर यह सामने आ गया तो नरेंद्र मोदी जी और राजनाथ सिंह जी की सच्चाई उजागर हो जाएगी। जब चीन हमारे सामने था और आगे बढ़ रहा था, तब 56 इंच का सीना कहाँ गया?”

खड़गे ने राहुल गांधी का समर्थन किया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा नेतृत्व इस किताब से इतना विचलित क्यों दिखाई दे रहा है।

“पूर्व सेना प्रमुख की किताब में आखिर ऐसा क्या लिखा है, जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री इतने घबरा गए हैं? उनकी किताब के प्रकाशन को कौन रोक रहा है? पूरा देश जानता है कि भाजपा का राष्ट्रवाद नकली है!” खड़गे ने एक्स पर हिंदी में पोस्ट करते हुए कहा।