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भारत ने चीन की सीमा के पास अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए न्योमा एयरबेस का उद्घाटन किया
भारत ने पूर्वी लद्दाख में अपना नया न्योमा एयरबेस सक्रिय कर दिया है, जिससे 2020 से जारी तनाव के बीच चीन की सीमा के पास उसकी सैन्य शक्ति और मजबूत हो गई है।

भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास न्योमा एयरबेस का उद्घाटन किया। यह नया बेस पूर्वी लद्दाख में भारत की वायु और जमीनी क्षमता को और मजबूत करता है।

यह उद्घाटन ऐसे समय हुआ जब सेना अरुणाचल प्रदेश में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ नामक अभ्यास कर रही है, जिसका मुख्य फोकस ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध संचालन है। दोनों घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि भारत चीन की सीमा पर अपनी तैयारी को लेकर गंभीर है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों में फिर से संतुलन लाया जा रहा है। सैन्य स्तर पर ‘कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स’ (CBMs) को भी धीरे-धीरे मजबूत किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है।”

उन्होंने आगे कहा, “LAC पर तनाव कम न होने के कारण सैनिक लगातार अग्रिम मोर्चों पर तैनात रहेंगे — यह 2020 के अप्रैल-मई में चीन की घुसपैठ के बाद लगातार छठा सर्दी का मौसम होगा।”

इस एयरबेस को हाल ही में क्षेत्रीय अभियानों को बढ़ावा देने के लिए ₹230 करोड़ की लागत से उन्नत किया गया है।

वायुसेना प्रमुख ने की पहली उड़ान

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने खुद दिल्ली के पास हिंडन से C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान उड़ाकर न्योमा के मुदह एयरफील्ड पर उतरते हुए एयरबेस का उद्घाटन किया।

13,710 फीट की ऊंचाई पर स्थित न्योमा विश्व के सबसे ऊंचे एयरफील्ड्स में से एक है। सिंह के साथ वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भी मौजूद थे।

उनकी उड़ान ने इस रणनीतिक रूप से अहम बेस को आधिकारिक रूप से सक्रिय कर दिया, जो भविष्य में लद्दाख में वायु अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

न्योमा एयरबेस की प्रमुख विशेषताएँ

न्योमा LAC से केवल 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हालिया अपग्रेड ने इसे एक साधारण एयरस्ट्रिप से पूर्ण विकसित एयरबेस में बदल दिया है, जिसमें शामिल हैं —

  • 2.7 किलोमीटर लंबा कंक्रीट रनवे

  • आधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) परिसर

  • हैंगर, क्रैश बे, और कर्मियों के लिए आवासीय सुविधाएँ

अब यह बेस भारी परिवहन विमानों और लड़ाकू विमानों दोनों को संभालने में सक्षम है। इससे सैनिकों, हथियारों और रसद सामग्री को पैंगोंग त्सो, देमचोक और देपसांग जैसे क्षेत्रों में तेजी से पहुंचाना संभव होगा।

यह उम्मीद की जा रही है कि 2026 की शुरुआत तक यहां से फाइटर जेट संचालन शुरू हो जाएगा, हालांकि ऊंचाई पर पतली हवा एक तकनीकी चुनौती बनी रहेगी।

चीन भी बढ़ा रहा है सीमा ढांचा

पिछले पाँच वर्षों में चीन ने भी सीमा के पास अपने एयरबेसों को उन्नत किया है। उसने J-20 स्टील्थ फाइटर, बॉम्बर्स, टोही विमान और ड्रोन को होटन, काशगर, शिगात्से, बांगदा, निंगची और होपिंग जैसे बेसों पर तैनात किया है।

बीजिंग ने LAC के साथ कई नए हेलिपोर्ट भी बनाए हैं, जिससे सैनिकों की आवाजाही और रसद आपूर्ति को बेहतर किया जा सके।

पूर्वी प्रचंड प्रहार: बड़ा सैन्य अभ्यास जारी

इसी समय भारत अरुणाचल प्रदेश के मचुका और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ अभ्यास कर रहा है। इसमें सेना की 3 स्पीयर कॉर्प्स के हजारों सैनिक भाग ले रहे हैं।

इन अभ्यासों का उद्देश्य त्वरित सैनिक तैनाती, सटीक हमले और रसद तैयारियों की क्षमता का परीक्षण करना है।

एक अधिकारी ने कहा, “संघर्ष के दौरान सही समय पर सही जगह पर सही बल पहुँचना अत्यंत आवश्यक है।”

सीमा पर वायु नेटवर्क का विस्तार

न्योमा अब लद्दाख में लेह, कारगिल, थॉइस और दौलत बेग ओल्डी के बाद भारतीय वायुसेना का एक और प्रमुख बेस बन गया है। इसके अलावा, भारत ने अरुणाचल प्रदेश में पासीघाट, मचुका, वालोंग, तुटिंग, अलोंग और ज़ीरो में अपने एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स (ALGs) को भी उन्नत किया है।

इन सुधारों से भारत की चीन सीमा पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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