संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने चल रही शांति वार्ताओं के बावजूद एक-दूसरे पर नए सैन्य हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वाशिंगटन ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया और तेहरान ने जवाब में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लेबनान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच चर्चा सक्रिय रूप से जारी है।
ईरान का कहना है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को तब तक मंजूरी नहीं देगा, जब तक उसमें ईरानी अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा सुनिश्चित न हो जाए। इस बीच परमाणु, सैन्य और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेदों के कारण दोनों देशों के बीच वार्ता ठप बनी हुई है।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मॉस्को सुरक्षा मंच में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया और रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी की पुनः पुष्टि की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई ने एक वैश्विक आपदा को टाल दिया और तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया।
मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के अंतिम प्रयास के रूप में 45 दिनों के युद्धविराम की योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि स्थिति के और अधिक गंभीर होने से बचाया जा सके।
भारत ने कहा है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में युद्धपोत भेजने की किसी भी योजना पर अमेरिका के साथ कोई चर्चा नहीं की है, जबकि बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक कोडित ईरानी प्रसारण को इंटरसेप्ट किया है, जो विदेशों में स्लीपर एजेंटों को सक्रिय करने का संकेत हो सकता है। इसके बाद पूरे अमेरिका में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है।