खाड़ी देशों ने कहा है कि ईरान के साथ भविष्य में होने वाला व्यापार और निवेश इस बात पर निर्भर करेगा कि तेहरान क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करता है या नहीं। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग करने वाले जहाजों पर कोई टोल या शुल्क नहीं लगाया जाएगा। वहीं, रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से बंद करने की घोषणा की है और युद्धविराम अवधि समाप्त होने के बाद भविष्य में संभावित समुद्री शुल्क लागू करने के संकेत भी दिए हैं।
अमेरिका और इजरायल द्वारा कथित युद्धविराम उल्लंघनों का आरोप लगाते हुए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। साथ ही, तेहरान ने आगे और कदम उठाने की चेतावनी भी दी, हालांकि उसका वार्ता दल स्विट्जरलैंड में बातचीत फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते में प्रगति के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी फिर से शुरू हो गई है, जबकि औपचारिक युद्धविराम समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लेबनान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच चर्चा सक्रिय रूप से जारी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर लंबे समय से जारी नाकाबंदी के बावजूद भारत ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से अपने प्रमुख जहाजों की आवाजाही जारी रखी है। इससे क्षेत्रीय तनाव के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा बनी रही और तेल, गैस सहित आवश्यक आपूर्तियों का प्रवाह प्रभावित नहीं हुआ।
अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए ईरान के तेल निर्यात को रोककर उसे बातचीत के लिए मजबूर करना चाहता है, जबकि युद्धविराम जारी रहने के बावजूद तनाव बना हुआ है।
भारत ने कहा है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में युद्धपोत भेजने की किसी भी योजना पर अमेरिका के साथ कोई चर्चा नहीं की है, जबकि बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर विचार कर रहे हैं।