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पुतिन की अमेरिकी दूतों से मुलाकात, अधिकारियों ने बातचीत को ‘उपयोगी’ बताया लेकिन कब्ज़े वाले क्षेत्रों पर कोई समझौता नहीं
पुतिन ने अमेरिकी दूतों के साथ लगभग पाँच घंटे तक “रचनात्मक” बातचीत की, लेकिन रूस ने यूक्रेन के कब्ज़े वाले क्षेत्रों पर किसी भी समझौते से इनकार कर दिया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुशनर के साथ करीब पाँच घंटे लंबी बैठक की। अधिकारियों ने इसे “रचनात्मक” बताया, लेकिन क्रेमलिन ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई समझौता नहीं हुआ—जो यूक्रेन के लिए अमेरिकी शांति योजना का सबसे बड़ा अवरोध बना हुआ है।

पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बातचीत को “उपयोगी” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि अभी “बहुत काम” करना बाकी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यूक्रेन के लिए “कोई समझौता-युक्त संस्करण” मौजूद नहीं है। रूस को अमेरिकी प्रस्तावों के कुछ हिस्से स्वीकार्य हैं, लेकिन अन्य को वह खारिज करता है।

अमेरिकी प्रस्तावों की समीक्षा, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं

बैठक के दौरान पुतिन ने अमेरिका की ओर से भेजी गई शांति प्रस्तावों पर विस्तार से अध्ययन किया। क्रेमलिन को इससे पहले चार दस्तावेज भेजे जा चुके थे।

उशाकोव के अनुसार, वार्ताकारों ने इन प्रस्तावों की सामान्य रूपरेखा पर चर्चा की, लेकिन किसी बिंदु की सटीक भाषा पर बात नहीं हुई। कोई ठोस समझौता भी नहीं बन पाया। साथ ही, पुतिन–ट्रंप की नई बैठक को लेकर भी कोई निर्णय नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, “बातचीत बहुत उपयोगी, रचनात्मक और बेहद सारगर्भित थी, और पाँच मिनट नहीं बल्कि पाँच घंटे चली।”

यूक्रेन के कब्ज़े वाले इलाकों को लेकर उन्होंने साफ कहा कि रूस अभी झुकने को तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा, “अभी तक समझौता नहीं मिला है, लेकिन कुछ अमेरिकी सुझावों पर चर्चा हो सकती है। कुछ प्रस्तावित शब्द हमें स्वीकार नहीं हैं, इसलिए काम जारी रहेगा।”

यूक्रेन पर बढ़ते दबाव के बीच बातचीत

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में भारी कूटनीतिक गतिविधि देखी गई है। अमेरिकी शांति योजना में भी संशोधन किया गया है क्योंकि कीव और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने कई चिंताएँ जताई थीं।

इन कोशिशों के बावजूद, जमीन और सुरक्षा से जुड़े गहरे मतभेद अब भी बने हुए हैं, जिससे प्रगति धीमी है।

बातचीत से पहले पुतिन का कड़ा संदेश

बैठक शुरू होने से ठीक पहले पुतिन ने अपना सख्त रुख साफ कर दिया। उन्होंने पूर्वी यूक्रेन के महत्वपूर्ण शहर पोकरोव्स्क का ज़िक्र किया, जिसे रूसी सेना ने हाल ही में अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया है। उन्होंने इसे “विशेष सैन्य अभियान की शुरुआत में निर्धारित सभी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक अच्छा आधार” बताया।

यह बयान दर्शाता है कि मॉस्को अभी भी मानता है कि वह बढ़त में है और उसे बड़े समझौते करने का दबाव महसूस नहीं होता।

इसके अलावा, कई क्षेत्रों में यूक्रेनी सेना को बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

यूरोप को चेतावनी और और अधिक हमलों का संकेत

पुतिन ने यूरोपीय देशों पर शांति समझौते में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कड़ा चेतावनी बयान देते हुए कहा, “हम यूरोप से युद्ध करने की योजना नहीं बना रहे, लेकिन अगर यूरोप चाहता है और शुरू करता है, तो हम अभी तैयार हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि रूस यूक्रेन के बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़ाएगा। यह रूस की “शैडो फ्लीट”—पुराने जहाज जिनसे रूस तेल भेजकर प्रतिबंधों से बचता है—पर हमलों की प्रतिक्रिया होगी।

यूक्रेन की सरकार में भ्रष्टाचार के एक नए मामले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “यूक्रेन का नेतृत्व युद्ध क्षेत्र की स्थिति से अलग मुद्दों में उलझा हुआ है। मानो वे किसी दूसरी दुनिया में रहते हों।”

जल्द शांति की उम्मीद नहीं

लंबी और गंभीर बातचीत के बावजूद कोई बड़ा परिणाम नहीं निकला। दोनों पक्ष अपने रुख पर अडिग हैं। क्षेत्रीय विवाद अब भी सबसे कठिन मुद्दा है।

फिलहाल बातचीत जारी रहेगी, लेकिन मॉस्को के तीखे बयानों और युद्धक्षेत्र में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जल्द किसी शांति समझौते की संभावना कम लगती है।