अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा इबोला प्रकोप 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैली घातक महामारी जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है। एजेंसी ने कहा कि तत्काल और अधिक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की आवश्यकता है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है और हजारों अतिरिक्त लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं।
CDC के सेंटर फॉर फोरकास्टिंग एंड आउटब्रेक एनालिटिक्स के निदेशक जेसन एशर ने कहा, “उस स्तर की स्थिति संभव है।”
CDC ने पश्चिम अफ्रीका की महामारी से की तुलना
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीका इबोला प्रकोप से की है। उस महामारी में 28,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
एजेंसी ने अपना आकलन शुक्रवार को मॉर्बिडिटी एंड मॉर्टेलिटी वीकली रिपोर्ट में प्रकाशित दस्तावेजों के माध्यम से जारी किया।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सबसे खराब स्थिति को अभी भी रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित लोगों की तेजी से पहचान, उन्हें अलग करना और उचित इलाज उपलब्ध कराना जरूरी है।
मजबूत प्रतिक्रिया से संक्रमण की रफ्तार हो सकती है कम
CDC ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य टीमों को जमीनी स्तर पर अपने प्रयासों का विस्तार करना होगा।
एजेंसी का मानना है कि संक्रमण को रोकने के लिए अधिक संख्या में मरीजों की पहचान कर उन्हें अलग करना आवश्यक है। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि संक्रमित लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा मिले।
CDC के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उसी स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की जरूरत पड़ सकती है, जिसने पश्चिम अफ्रीका के इबोला प्रकोप को काबू करने में मदद की थी।
कार्रवाई के लिए तैयार किए गए मॉडल
जेसन एशर ने स्पष्ट किया कि CDC के अनुमान भविष्यवाणी नहीं हैं। इन मॉडलों का उद्देश्य सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों को अपनी रणनीति बनाने में मदद करना है।उन्होंने कहा, “इनका उद्देश्य कार्रवाई को समर्थन देना है, डर पैदा करना नहीं।”
CDC ने चार अलग-अलग परिदृश्य तैयार किए हैं। इनमें सबसे कमजोर स्थिति वह है, जहां केवल 20 प्रतिशत मरीजों को अलग कर इलाज दिया जाता है, जबकि सबसे प्रभावी स्थिति में यह आंकड़ा 95 प्रतिशत तक पहुंचता है।
मामले 20,000 से अधिक हो सकते हैं
CDC ने चेतावनी दी कि यदि रोकथाम के प्रयास कमजोर रहे, तो वायरस तेजी से फैल सकता है। एजेंसी के सबसे खराब परिदृश्य के अनुसार, अगले तीन महीनों में मामलों की संख्या 20,000 से अधिक होने की 65 प्रतिशत संभावना है।
इन निष्कर्षों ने बीमारी को नियंत्रित करने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित किया है।
अधिकारियों ने कहा- स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं
CDC की इबोला प्रतिक्रिया टीम का नेतृत्व कर रहे सतीश पिल्लई ने कहा कि अधिकारियों को अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने संक्रमित लोगों को अलग रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “कुल कितने लोग संक्रमित हैं और जिन्हें अलग रखने की जरूरत है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।”
पिल्लई ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात संकेत देते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में आइसोलेशन की दर अभी भी कम है, जिससे प्रकोप के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
WHO और अफ्रीका CDC ने मांगी आपातकालीन फंडिंग
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अफ्रीकी संघ की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी अफ्रीका CDC ने अतिरिक्त वित्तीय सहायता की अपील की है। दोनों संगठनों ने कहा कि उन्हें अगले छह महीनों में 518 मिलियन डॉलर की आवश्यकता है, ताकि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और पड़ोसी देशों में प्रकोप से मुकाबला किया जा सके।
यह धनराशि निगरानी, उपचार, आइसोलेशन और अन्य आपातकालीन उपायों पर खर्च की जाएगी।
DRC में फैला इबोला का दुर्लभ स्ट्रेन
स्वास्थ्य अधिकारियों ने 15 मई को उत्तर-पूर्वी DRC में इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस की पहचान होने से पहले ही यह कुछ समय से फैल रहा था।
यह प्रकोप इबोला के दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है। WHO के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, DRC में अब तक 381 पुष्ट मामले और 64 मौतें दर्ज की गई हैं। वायरस तीन प्रांतों तक फैल चुका है।
इतुरी बना संक्रमण का केंद्र
इतुरी प्रांत सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। अफ्रीका CDC के अनुसार, पुष्ट मामलों का 90 प्रतिशत और पुष्ट मौतों का 76 प्रतिशत हिस्सा अकेले इतुरी में दर्ज किया गया है।
स्वास्थ्य टीमें अपनी अधिकांश कार्रवाई इसी प्रांत में केंद्रित किए हुए हैं।
युगांडा में भी पहुंचे मामले
यह प्रकोप पड़ोसी देश युगांडा तक भी पहुंच चुका है। युगांडा के अधिकारियों ने 16 मामलों और एक मौत की पुष्टि की है। हालांकि बढ़ते मामलों के बीच कुछ मरीज स्वस्थ भी हुए हैं। DRC में सात और युगांडा में दो लोग इबोला से सफलतापूर्वक ठीक हो चुके हैं।
इन मरीजों के स्वस्थ होने से स्वास्थ्यकर्मियों को उम्मीद की एक छोटी किरण जरूर मिली है, जबकि वे संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।
