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नासा ने चंद्रमा के ओरिएंटेल बेसिन का पहली बार पूरा दृश्य साझा किया
नासा के आर्टेमिस II मिशन के क्रू ने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के चारों ओर अपनी यात्रा के दौरान ओरिएंटेल बेसिन का इतिहास में पहली बार पूरा दृश्य कैद किया।

नासा ने रविवार को आर्टेमिस II मिशन के क्रू द्वारा ली गई चंद्रमा की एक नई तस्वीर जारी की। अंतरिक्ष यात्री इस समय चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भर रहे हैं और उसका वह दूर वाला हिस्सा (फार साइड) तस्वीरों में कैद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे अब तक पूरी तरह नहीं देखा गया है।

इस तस्वीर में चंद्रमा की सतह के दाहिने किनारे पर स्थित ओरिएंटेल बेसिन का पूरा दृश्य दिखाई देता है। यह पहली बार है जब इस पूरे बेसिन को इंसानी आंखों ने सीधे देखा है।

नासा ने एक पोस्ट में कहा, “हमारे नासा आर्टेमिस II क्रू की इस नई तस्वीर में आप चंद्रमा के डिस्क के दाहिने किनारे पर ओरिएंटेल बेसिन देख सकते हैं। यह मिशन पहली बार है जब पूरे बेसिन को मानव आंखों से देखा गया है।”

50 से अधिक वर्षों में पहला मानव चंद्र मिशन

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरायन अंतरिक्ष यान में सवार होकर यात्रा कर रहे हैं। क्रू में कनाडा के जेरमी हैनसन और अमेरिका के विक्टर ग्लोवर, रीड वाइज़मैन और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं।

ये सभी 1972 में हुए अपोलो 17 मिशन के बाद चंद्रमा की ओर यात्रा करने वाले पहले इंसान हैं। क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर भी इतिहास बनाने जा रहे हैं, क्योंकि वे चंद्रमा की यात्रा करने वाली पहली महिला और पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे।

मिशन का लक्ष्य: चंद्रमा के दूर वाले हिस्से का अध्ययन

आर्टेमिस II का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के उस हिस्से की विस्तृत तस्वीरें लेना है, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। यह मिशन 53 से अधिक वर्षों में पहला मानव चंद्र अभियान है और यह नासा के अपोलो कार्यक्रम द्वारा शुरू किए गए काम को आगे बढ़ाता है।

रिकॉर्ड बनाने वाली यात्रा

आर्टेमिस II मानव अंतरिक्ष यात्रा की दूरी का नया रिकॉर्ड भी बना सकता है। यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से 2,52,000 मील (लगभग 4,00,000 किमी) से अधिक दूरी तय करेगा, फिर चंद्रमा के चारों ओर घूमकर वापस लौट आएगा। इस दौरान यह चंद्रमा पर न तो उतरेगा और न ही उसकी कक्षा में प्रवेश करेगा।

फिलहाल यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम है। रिपोर्टों के अनुसार रविवार तक ओरायन अंतरिक्ष यान चंद्रमा तक की आधी दूरी पार कर चुका था। यह मिशन लगभग 10 दिनों तक चलेगा और 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ समाप्त होने की योजना है।

भविष्य के चंद्र मिशनों की ओर एक कदम

यह मिशन नासा की उस दीर्घकालिक योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत चंद्रमा पर मानव की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। एजेंसी का लक्ष्य 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजना है।

टॉयलेट खराब होने से क्रू को चुनौती

सफल प्रक्षेपण के बावजूद अंतरिक्ष यात्रियों को एक अप्रत्याशित समस्या का सामना करना पड़ा—अंतरिक्ष यान का टॉयलेट सिस्टम खराब हो गया। जब तक समस्या ठीक नहीं हो जाती, मिशन कंट्रोल ने क्रू को बैकअप यूरिन कलेक्शन बैग का अधिक उपयोग करने की सलाह दी है। रिपोर्टों के अनुसार बर्फ जमने के कारण सिस्टम में रुकावट आ गई है, जिससे अपशिष्ट निपटान सही तरीके से नहीं हो पा रहा।

हालांकि ठोस अपशिष्ट के लिए टॉयलेट अभी भी काम कर रहा है। मिशन मैनेजमेंट टीम के प्रमुख जॉन हनीकट ने कहा कि सिस्टम पूरी तरह ठीक नहीं है, लेकिन अभी उपयोग के योग्य है और अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित हैं।

मिशन सुचारु रूप से जारी

तकनीकी समस्या के बावजूद आर्टेमिस II मिशन योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है। क्रू अपनी ऐतिहासिक यात्रा जारी रखे हुए है, जो मानव अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।