अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके व्यापक वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद कड़ी आलोचना की। उन्होंने फैसले को “बेहद निराशाजनक” बताया और कुछ न्यायाधीशों पर “विदेशी हितों” के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया।
हालांकि, फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इसे “सेक्शन 122” नामक एक अलग व्यापार प्रावधान के तहत लागू करेंगे।
अदालत ने आपातकालीन कानून के उपयोग पर रोक लगाई
अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। ट्रंप ने अपने व्यापक वैश्विक शुल्कों को उचित ठहराने के लिए इसी कानून का सहारा लिया था।
रूढ़िवादी बहुमत वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यह कानून टैरिफ लगाने की शक्तियों के लिए बनाया ही नहीं गया था। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा, “IEEPA में टैरिफ या शुल्क का कोई उल्लेख नहीं है।”
अदालत ने आगे कहा कि “यदि कांग्रेस IEEPA के तहत टैरिफ लगाने जैसी विशिष्ट और असाधारण शक्ति देना चाहती, तो वह इसे स्पष्ट रूप से करती, जैसा कि उसने अन्य टैरिफ कानूनों में लगातार किया है।”
तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने तीन रूढ़िवादी न्यायाधीशों के साथ मिलकर बहुमत बनाया। इस फैसले ने निचली अदालतों के उन निर्णयों को भी बरकरार रखा, जिनमें IEEPA के आधार पर लगाए गए ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहराया गया था।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया
ट्रंप ने इस निर्णय पर कड़ा विरोध जताया। हालांकि उन्होंने उन न्यायाधीशों में से दो को स्वयं नामित किया था जिन्होंने उनके खिलाफ फैसला दिया, फिर भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से अदालत के कुछ सदस्यों की आलोचना की।
ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “मैं अदालत के कुछ सदस्यों से शर्मिंदा हूं, बिल्कुल शर्मिंदा, क्योंकि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने का साहस नहीं है।”
साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस फैसले ने उनकी स्थिति को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला राष्ट्रपति की व्यापार को विनियमित करने और टैरिफ लगाने की क्षमता को पहले से अधिक शक्तिशाली और अधिक स्पष्ट बनाता है, कम नहीं।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश की रक्षा के लिए राष्ट्रपति वास्तव में पहले से अधिक टैरिफ लगा सकता है,” और जोर देकर कहा कि इस नतीजे ने उन्हें “और अधिक शक्तिशाली” बना दिया है।
कावानॉ ने असहमति जताई
न्यायाधीशों में ब्रेट कावानॉ एकमात्र ट्रंप-नामित न्यायाधीश थे जिन्होंने उनका समर्थन किया। कावानॉ ने असहमति मत (डिसेंट) जारी किया और उनके साथ रूढ़िवादी न्यायाधीश क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलीटो भी शामिल हुए।
दूसरे कार्यकाल में बड़ा झटका
यह फैसला पिछले वर्ष व्हाइट हाउस में वापसी के बाद सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप की सबसे बड़ी कानूनी हार माना जा रहा है।
अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने आर्थिक दबाव और कूटनीतिक वार्ताओं के साधन के रूप में टैरिफ का व्यापक उपयोग किया। उन्होंने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का हवाला देकर लगभग सभी अमेरिकी व्यापार साझेदारों पर शुल्क लगाए। इनमें उन देशों पर “पारस्परिक” टैरिफ भी शामिल थे जिन्हें वाशिंगटन व्यापार प्रथाओं में अनुचित मानता था। इसके अलावा, उन्होंने मैक्सिको, कनाडा और चीन पर आव्रजन मुद्दों और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में अलग-अलग शुल्क लगाए।
हालांकि, शुक्रवार के इस फैसले का असर स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य वस्तुओं जैसे आयात पर लगाए गए क्षेत्र-विशिष्ट टैरिफ पर नहीं पड़ेगा। वे शुल्क अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लगाए गए थे। इसके अतिरिक्त, कई सरकारी जांच अभी भी जारी हैं, जिनके परिणामस्वरूप भविष्य में नए क्षेत्रीय टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
बैकअप योजना तैयार
फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने कहा कि उनके पास दंडात्मक शुल्क जारी रखने के लिए “बैकअप योजना” है। उन्होंने तेजी से सेक्शन 122 को सक्रिय करते हुए समान 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की।
हालांकि अदालत ने IEEPA के उपयोग पर रोक लगा दी है, ट्रंप ने संकेत दिया कि वह अपने आक्रामक व्यापार एजेंडा को जारी रखने के लिए वैकल्पिक वैधानिक शक्तियों का सहारा लेंगे।
