नेपाल इस समय वर्षों की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। तिब्बत सीमा के पास के इलाकों में आई
भीषण अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में 626 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि करीब 2,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने पूरे क्षेत्र में गांवों और कई परियोजना स्थलों को तबाह कर दिया है।
इससे पहले चीनी सरकारी मीडिया ने पांच लोगों की मौत की जानकारी दी थी, जिसके बाद उस समय संयुक्त रूप से रिपोर्ट की गई मृतकों की संख्या कम से कम 584 हो गई थी। बचाव दल अब भी ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो मलबे में फंसे हो सकते हैं या लापता हैं, इसलिए स्थिति लगातार बदल रही है।
शुक्रवार को तिब्बत में मलबे से बना एक बांध टूटने के बाद बचावकर्मियों के लिए खतरा और बढ़ गया है। इससे अचानक पानी और मलबे का एक और तेज बहाव आने की आशंका पैदा हो गई है।
बचाव दल को नए बाढ़ के खतरे की चेतावनी
नेपाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में काम कर रहे बचावकर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि तिब्बत में मलबे से बना एक बांध टूट गया है।
इस घटना से जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे बचाव दलों के लिए खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों को आशंका है कि पानी और मलबे का एक और तेज बहाव नीचे की ओर आकर पहले से तबाह इलाकों में स्थिति को और खराब कर सकता है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, खोज और बचाव अभियान के लिए 14,829 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने अब तक प्रभावित इलाकों से 3,742 लोगों को बचाया है।
बचाव अभियान बेहद कठिन परिस्थितियों में चलाया जा रहा है। क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और दोबारा बाढ़ आने की आशंका ने राहत एवं बचाव कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
320 भारतीयों से अब भी संपर्क नहीं
इस आपदा से नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं, 21 भारतीय काठमांडू से दिल्ली लौट चुके हैं।
भारतीय अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और लापता या संपर्क से बाहर लोगों का पता लगाने के प्रयासों में समन्वय कर रहे हैं।
ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, यह आपदा ग्लेशियर के टूटने से शुरू हुई, जिसके कारण बर्फ और मलबे का विशाल बहाव आया।
इससे बने तेज बहाव में बड़ी मात्रा में बर्फ, कीचड़ और पानी बहकर पूरे क्षेत्र में फैल गया। मलबे के अचानक खिसकने से कुछ इलाकों में पानी के बड़े-बड़े जमाव भी बन गए।
इनमें से एक जल संरचना के शुक्रवार को तिब्बत में टूटने की खबर है। इससे बचाव दलों के जीवित बचे लोगों की तलाश के बीच एक नया खतरा पैदा हो गया है।
इस आपदा को 2015 के भूकंप के बाद नेपाल की सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बताया जा रहा है, जो इसके विनाश की भयावहता को दर्शाता है।
भोटे कोशी नदी में अचानक बढ़ा जलस्तर
फ्लैश फ्लड तिब्बत की दिशा से आने वाली भोटे कोशी नदी के जरिए तेजी से नीचे की ओर आई। नदी के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि से रसुवा जिले के तिमुरे और आसपास के स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी तबाही हुई।
नेपाल सेना के अनुसार, तेजी से बढ़े जलस्तर के कारण प्रभावित इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ। बाढ़ के तेज बहाव से गांवों और कई परियोजना स्थलों को भी नुकसान पहुंचा।
बाढ़ की गति और भयावहता इतनी अधिक थी कि संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रतिक्रिया देने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए बहुत कम समय मिला।
नेपाल ने बचाव और राहत के लिए सुरक्षा बल तैनात किए
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को रसुवा तथा आसपास के इलाकों में तैनात किया गया है।
सुरक्षा बल खोज, बचाव और राहत कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अधिकारी आपदा प्रभावित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
हजारों लोगों के अब भी लापता होने की खबर और दोबारा बाढ़ आने के खतरे के बीच बचाव दल समय के खिलाफ दौड़ लगा रहे हैं। अधिकारी तिब्बत में होने वाले घटनाक्रम पर भी करीब से नजर रख रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी और मलबे का कोई और तेज बहाव नेपाल तक पहुंच सकता है या नहीं।