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रॉबर्ट गिलमैन कौन हैं? 4 साल बाद रूस ने रिहा किए पूर्व अमेरिकी मरीन
पूर्व अमेरिकी मरीन रॉबर्ट गिलमैन को तेजी से बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद चार साल से अधिक समय के बाद रूस की हिरासत से रिहा कर दिया गया है।

32 वर्षीय पूर्व अमेरिकी मरीन और अंग्रेजी शिक्षक रॉबर्ट गिलमैन को चार साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बाद रूस की कैद से रिहा कर दिया गया है। गिलमैन अब अमेरिका वापस लौट रहे हैं। उनकी रिहाई स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद हुई है।

उनके परिवार और समर्थकों ने हाल ही में उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनका काफी वजन कम हो गया था और वह लगभग प्रतिक्रिया देना बंद कर चुके थे।

ट्रंप ने कहा- रूस ने गिलमैन को मानवीय माफी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गिलमैन की रिहाई की घोषणा की और कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें एकतरफा मानवीय माफी दी है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया।

ट्रंप के अनुसार, रूस ने इसके बदले किसी अन्य कैदी की रिहाई की मांग नहीं की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते में पारंपरिक कैदी अदला-बदली शामिल नहीं थी।

अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि गिलमैन की रिहाई किसी कैदी विनिमय का हिस्सा नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस व्यवस्था के तहत अमेरिका की ओर से दी गई किसी भी रियायत की जानकारी नहीं है। गिलमैन अब अपने घर लौट रहे हैं, जहां उन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल मिलने की उम्मीद है।

रॉबर्ट गिलमैन को 2022 में रूस में गिरफ्तार किया गया था

रूसी अधिकारियों ने जनवरी 2022 में गिलमैन को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उन्हें वोरोनेझ में ट्रेन से यात्रा करते समय हिरासत में लिया था। यह शहर मॉस्को से लगभग 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। रूसी अधिकारियों ने गिलमैन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने शराब के नशे में एक पुलिस अधिकारी को लात मारी थी।

उनके परिवार और बचाव पक्ष के वकीलों ने इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि घटना के समय गिलमैन गंभीर रूप से बीमार थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सिर में चोट (कनकशन) लगी थी। एक रूसी अदालत ने शुरुआत में गिलमैन को साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।

अतिरिक्त आरोपों से बढ़ी गिलमैन की सजा

पहली सजा के बाद भी गिलमैन की कानूनी परेशानियां जारी रहीं। रूसी अभियोजकों ने बाद में उनके खिलाफ अतिरिक्त आरोप लगाए। उन पर जेल गार्डों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया। अतिरिक्त दोषसिद्धियों के बाद उनकी सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई।

उनके समर्थकों ने उनकी जेल अवधि को बार-बार बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि नए मामलों के कारण वह वर्षों तक हिरासत में रहे। उन्हें यह भी डर था कि रूस भविष्य में अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत में गिलमैन की लगातार हिरासत को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।

रूस की हिरासत में गिलमैन का स्वास्थ्य बिगड़ा

हाल के हफ्तों में गिलमैन के स्वास्थ्य को लेकर चिंता तेजी से बढ़ गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, रूस की हिरासत में रहते हुए उनकी हालत खराब हो गई थी। हालत गंभीर होने के बाद अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें एक दंड कॉलोनी के अस्पताल से नागरिक आपातकालीन विभाग में स्थानांतरित कर दिया था।

उनके परिवार ने कहा कि उनका काफी वजन कम हो गया था। उन्होंने यह भी बताया कि वह लगभग प्रतिक्रिया देना बंद कर चुके थे। उनकी स्थिति कथित तौर पर डिसोसिएटिव या कैटाटोनिक जैसी अवस्था के समान थी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि गिलमैन को निमोनिया था और पोषण के लिए उन्हें फीडिंग ट्यूब की जरूरत पड़ रही थी।

उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बाद उनके परिवार और मानवाधिकार समूहों ने मानवीय आधार पर उनकी रिहाई की मांग फिर से तेज कर दी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि उनकी हालत जानलेवा हो सकती है।

गिलमैन अपनी मां के साथ अमेरिका लौट रहे हैं

गिलमैन अपनी मां नैन्सी के साथ अमेरिका वापस लौट रहे हैं। दोनों अमेरिकी सरकार के विमान से यात्रा कर रहे हैं। उम्मीद है कि गिलमैन पहले मैरीलैंड पहुंचेंगे। इसके बाद अधिकारी उन्हें टेक्सास स्थित अमेरिकी सैन्य चिकित्सा केंद्र ले जाने की योजना बना रहे हैं।

डॉक्टर उनकी विस्तृत चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक जांच करेंगे। उन्हें रूस की हिरासत में बिताए वर्षों के दौरान विकसित हुई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इलाज भी दिया जाएगा।

गिलमैन की रिहाई से चार साल की हिरासत समाप्त

गिलमैन की रिहाई से रूस में उनकी चार साल से अधिक समय की कैद समाप्त हो गई है। अमेरिका लौटने के बाद उन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल मिल सकेगी, जिसकी मांग उनके परिवार और समर्थक लगातार उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए कर रहे थे। यह मामला रूस में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों को लेकर वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच बढ़ते कूटनीतिक प्रयासों को भी उजागर करता है।