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फीफा ने फोलारिन बालोगुन का विश्व कप निलंबन कैसे हटाया? जानिए नियम, विवाद और प्रतिक्रियाएं
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समीक्षा की मांग किए जाने के बाद फीफा ने फोलारिन बालोगुन पर लगे विश्व कप प्रतिबंध को निलंबित कर दिया। इस फैसले ने टूर्नामेंट की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

राउंड ऑफ 32 में बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में बालोगुन को सीधे रेड कार्ड दिखाया गया था। इसके साथ ही उन पर स्वतः एक मैच का निलंबन लागू हो गया था। हालांकि, बाद में फीफा ने यह प्रतिबंध निलंबित कर दिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन पर बातचीत के दौरान मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया। इस फैसले के बाद फुटबॉल जगत में व्यापक आलोचना हुई और कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या फीफा की अनुशासनात्मक प्रक्रिया पर राजनीतिक प्रभाव पड़ा है।

फोलारिन बालोगुन को रेड कार्ड क्यों मिला?

यह घटना 1 जुलाई को अमेरिका और बोस्निया एवं हर्जेगोविना के बीच खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में हुई। मैच के 64वें मिनट में बालोगुन एक ढीली गेंद का पीछा करते हुए बोस्नियाई डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच के टखने पर अपने बूट से जा लगे।

रेफरी राफेल क्लॉस ने खेल रोका और वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) से सलाह ली। इसके बाद उन्होंने पिच के किनारे लगे मॉनिटर पर घटना की समीक्षा की और बालोगुन को सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इसके बावजूद अमेरिका ने यह मुकाबला 2-0 से जीतकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में जगह बना ली। उस समय माना जा रहा था कि बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ अगला मैच नहीं खेल पाएंगे।

डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा से समीक्षा की मांग की

रविवार को स्थिति बदल गई। फीफा ने घोषणा की कि उसने बालोगुन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध निलंबित कर दिया है। इसके कुछ ही समय बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात की थी। ट्रंप ने कहा, "मैंने समीक्षा का अनुरोध किया क्योंकि मुझे नहीं लगा कि यह फाउल था। मैंने सिर्फ समीक्षा करने के लिए कहा था, यह नहीं कहा कि आपको ऐसा ही फैसला करना होगा।"

रेड कार्ड बालोगुन के रिकॉर्ड में बरकरार रहा, लेकिन फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ खेलने की अनुमति दे दी।

किस फीफा नियम के तहत बालोगुन को खेलने की अनुमति मिली?

फीफा ने अपने अनुशासनात्मक संहिता (Disciplinary Code) के अनुच्छेद 27 के आधार पर यह फैसला लिया। इस नियम के तहत फीफा की न्यायिक संस्था किसी अनुशासनात्मक सजा को निलंबित कर खिलाड़ी को परिवीक्षा (प्रोबेशन) पर रख सकती है।

बालोगुन को एक वर्ष की परिवीक्षा पर रखा गया है। यदि इस अवधि में वे दोबारा इसी तरह का अपराध करते हैं, तो फीफा निलंबित प्रतिबंध के साथ नया दंड भी लागू कर सकता है। फीफा ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 27 मैच फिक्सिंग के मामलों पर लागू नहीं होता, लेकिन अन्य अनुशासनात्मक मामलों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या फीफा ने पहले भी ऐसा किया है?

ऐसे फैसलों के उदाहरण बेहद कम हैं। 1970 में रेड कार्ड पर स्वतः एक मैच के निलंबन का नियम लागू होने के बाद से अब तक कोई भी खिलाड़ी विश्व कप में रेड कार्ड मिलने के बाद उस निलंबन से नहीं बच पाया था। इस नियम के लागू होने से पहले, 1962 विश्व कप के सेमीफाइनल में ब्राज़ील के महान खिलाड़ी गारिंचा को रेड कार्ड मिला था। बाद में अनुशासनात्मक समिति ने उन्हें फाइनल खेलने की अनुमति दे दी थी।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो को भी 2026 विश्व कप से पहले स्थगित निलंबन का लाभ मिला था, लेकिन वह सजा किसी अन्य प्रतियोगिता की थी, न कि विश्व कप मैच की। आधुनिक विश्व कप इतिहास में ऐसा कोई ज्ञात मामला नहीं है, जिसमें टूर्नामेंट के दौरान मिले रेड कार्ड पर स्वतः लगने वाले एक मैच के प्रतिबंध को फीफा ने निलंबित किया हो।

बेल्जियम ने फीफा के फैसले का विरोध किया

बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के इस फैसले का कड़ा विरोध किया। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला फीफा अनुशासनात्मक संहिता के अनुच्छेद 66.4, 2026 फीफा विश्व कप प्रतियोगिता नियमावली के अनुच्छेद 10.5 और फीफा विश्व कप 2026 सर्कुलर नंबर 16 के विपरीत है।

इन सभी नियमों के अनुसार, रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी को स्वतः एक मैच का निलंबन भुगतना अनिवार्य होता है।

फीफा ने अपने फैसले का किया बचाव

फीफा की अनुशासनात्मक समिति ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अनुच्छेद 27 उसे यह अधिकार देता है कि वह किसी भी अनुशासनात्मक सजा के क्रियान्वयन को निलंबित कर सकती है, बशर्ते मामला मैच में हेरफेर (मैच फिक्सिंग) से संबंधित न हो। समिति ने कहा कि, "अनुच्छेद 27 हमें किसी भी अनुशासनात्मक दंड के क्रियान्वयन को निलंबित करने का विवेकाधिकार देता है, जब तक कि मामला मैच में हेरफेर से जुड़ा न हो—और इस मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं था।"

समिति ने यह भी कहा कि अनुशासनात्मक संहिता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो उसे इस विवेकाधिकार का इस्तेमाल करने से रोकता हो। इस समिति की अध्यक्षता संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वकील मोहम्मद अल कमाली कर रहे हैं। फीफा कांग्रेस अपने सदस्यों का चुनाव चार वर्ष के कार्यकाल के लिए करती है।

कोच और फुटबॉल दिग्गजों ने फीफा की आलोचना की

कई प्रमुख फुटबॉल हस्तियों ने फीफा के इस फैसले पर सवाल उठाए। नॉर्वे के मुख्य कोच स्टाले सोलबाकेन ने कहा, "अगले रेड कार्ड का क्या होगा? तब क्या किया जाएगा? यह बहुत ही खराब फैसला है, जो विश्व कप को नुकसान पहुंचाएगा।"

इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस ट्यूखेल ने भी चिंता जताई। उन्होंने माना कि संभव है बालोगुन रेड कार्ड के हकदार न रहे हों, लेकिन उन्होंने कहा कि घटना की समीक्षा पहले ही वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) कर चुका था।

ट्यूखेल ने कहा, "फिर इस फैसले को कौन पलटेगा, कब पलटेगा और किस आधार पर? अब इसकी सीमा क्या होगी? मेरे लिए यह बहुत अजीब है। इसकी शुरुआत कहां होगी और इसका अंत कहां होगा?"

इंग्लैंड के पूर्व स्ट्राइकर इयान राइट ने भी फीफा की आलोचना करते हुए कहा, "हम खेल की ईमानदारी और पारदर्शिता की बात करते हैं, लेकिन इस टूर्नामेंट में कुछ टीमों के साथ जो हुआ है, वह शर्मनाक है।"

जियानी इन्फेंटिनो ने दी सफाई

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने पुष्टि की कि डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें फोन किया था। उन्होंने कहा कि वे नियमित रूप से दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों, सरकारी अधिकारियों, फुटबॉल से जुड़े लोगों और कारोबारी नेताओं से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते रहते हैं।

इन्फेंटिनो ने कहा, "इस मामले में मुझे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया था, ठीक वैसे ही जैसे मुझे दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों, सरकारी अधिकारियों, फुटबॉल हितधारकों और कारोबारी नेताओं के फोन अलग-अलग मुद्दों पर आते रहते हैं।"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की समीक्षा फीफा की स्वतंत्र न्यायिक संस्थाओं ने की थी और उन्होंने उनके काम में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया।

बालोगुन की वापसी के बावजूद अमेरिका बाहर

फीफा द्वारा प्रतिबंध निलंबित किए जाने के बाद फोलारिन बालोगुन ने प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में वापसी की। हालांकि, इससे मैच का नतीजा नहीं बदला। बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराकर सह-मेजबान टीम को फीफा विश्व कप से बाहर कर दिया

अमेरिका के टूर्नामेंट से बाहर होने के साथ यह विवाद भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन फीफा के इस फैसले ने टूर्नामेंट की अनुशासनात्मक प्रक्रिया की निरंतरता, निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।