रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली पर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी।
सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच में बोलते हुए पुतिन ने भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने इस साझेदारी को कई दशकों से विश्वास, आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित संबंध बताया। पुतिन के अनुसार, भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं के आधार पर फैसले लेता है और अन्य देशों के दबाव के कारण अपनी नीति बदलने की संभावना नहीं है।
उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक संप्रभु देश की तरह कार्य करता है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रतिबंधों की कोई भी संभावित धमकी तुरंत उल्टा असर करेगी।”
भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेता है
पुतिन ने जोर देकर कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपना रास्ता स्वयं चुनने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली लगातार ऐसी नीतियों का पालन करती रही है जो उसके राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करती हैं। उन्होंने कहा, “भारत एक संप्रभु देश है और उसे यह चुनने की पूरी स्वतंत्रता है कि कौन से उत्पाद उसके लिए सबसे आधुनिक और सबसे उपयुक्त हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा बाहरी राय की परवाह किए बिना स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाया है। “लोग चाहे कुछ भी कहें, भारत हमेशा इसी तरह काम करता आया है।”
रूस भारत को भरोसेमंद साझेदार मानता है
रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस को करीबी साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध 1947 से चले आ रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को “विश्वास और भाईचारे पर आधारित संबंध” बताया।
पुतिन ने यह भी कहा कि भारत के अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करने से रूस को कोई चिंता नहीं है। इसके बजाय मॉस्को भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखता है।
पुतिन ने मोदी पर अमेरिकी वीजा प्रतिबंध का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान पुतिन ने उस दौर को याद किया जब मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले अमेरिका ने उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा, “हम सभी उस समय को याद करते हैं जब प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।”
पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। “अब वह प्रधानमंत्री हैं, सभी प्रतिबंध समाप्त हो चुके हैं और अमेरिका तथा भारत के संबंध भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।”
पुतिन ने इस उदाहरण का उपयोग यह दिखाने के लिए किया कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय संबंध किस तरह बदल सकते हैं।
रक्षा सहयोग केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं
पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध केवल सैन्य खरीद तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों ने अनुसंधान, विकास और तकनीकी परियोजनाओं में भी मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा, “भारतीय मित्रों के साथ हमारे संबंध विशेष हैं क्योंकि आपसी विश्वास के कारण हम केवल व्यापार या खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहते।”
पुतिन के अनुसार, इस स्तर का सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास को दर्शाता है।
ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना का किया उल्लेख
सफल सहयोग के उदाहरण के रूप में पुतिन ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में शुरुआत से ही भारत और रूस दोनों के विशेषज्ञ शामिल थे और उन्होंने मिलकर दुनिया की सबसे प्रसिद्ध मिसाइल प्रणालियों में से एक का निर्माण किया।
पुतिन ने कहा, “भारतीय विशेषज्ञ शुरुआत से ही इस मिसाइल के डिजाइन में शामिल थे और रूसी विशेषज्ञ भी। इसका परिणाम शानदार रहा।”
रूस अब भी Su-57 लड़ाकू विमान देने को तैयार
पुतिन ने सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि रूस ने पहले भारत के साथ मिलकर इस विमान को विकसित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन यह साझेदारी आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद रूस ने परियोजना को स्वयं आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा, “Su-57 एक बेहद शानदार विमान है, संभवतः यह इस समय दुनिया का सबसे आधुनिक और उन्नत लड़ाकू विमान है।”
पुतिन ने आगे कहा, “हमने प्रस्ताव दिया था कि इसे मिलकर विकसित करें। यह संभव नहीं हो पाया, लेकिन हमने इसे अपने दम पर बनाया और हम Su-57 बेचने के लिए तैयार हैं।”
सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार रूस
पुतिन ने कहा कि भारत के सैन्य उपकरणों का एक बड़ा हिस्सा अब भी रूस से आता है, जो सोवियत संघ के दौर से चले आ रहे रक्षा सहयोग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रूस भारत के साथ सहयोग को और गहरा करने के लिए तैयार है, खासकर उन्नत रक्षा तकनीकों और भविष्य की सैन्य परियोजनाओं के क्षेत्र में।
रूसी राष्ट्रपति की टिप्पणियों ने यह स्पष्ट किया कि मॉस्को भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है और रक्षा, प्रौद्योगिकी तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग का दायरा और बढ़ाने का इच्छुक है।
