नासा अपने आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर एक स्थायी आधार (मून बेस) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का लक्ष्य केवल इंसानों को दोबारा चंद्रमा की सतह पर उतारना ही नहीं, बल्कि भविष्य में उन्हें वहां लंबे समय तक रहने और काम करने योग्य बनाना भी है।
इस परियोजना को समर्थन देने के लिए नासा ने कई अमेरिकी कंपनियों को रोबोटिक लैंडर, चंद्र वाहन, ड्रोन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास हेतु सैकड़ों मिलियन डॉलर के अनुबंध दिए हैं।
नासा ने साझा की मून बेस की रूपरेखा
26 मई को नासा ने अपने दीर्घकालिक मून बेस प्रोजेक्ट से जुड़ी नई जानकारियां जारी कीं। एजेंसी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट रोबोटिक प्रणालियों, चंद्र वाहनों और उछलकर चलने वाले ड्रोन की मदद से एक स्थायी चौकी विकसित करने की योजना बना रही है।
नासा के प्रशासक जेरेड आइजैकमैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह मून बेस अमेरिका और पूरी मानवता की किसी अन्य खगोलीय दुनिया पर पहली स्थायी चौकी होगा।”
नासा ने चार अमेरिकी कंपनियों को बड़े अनुबंध प्रदान किए हैं। जेफ बेजोस द्वारा स्थापित ब्लू ओरिजिन को 18.8 करोड़ डॉलर का अनुबंध मिला है, जिसके तहत वह दो ऐसे लैंडर विकसित करेगी जो चंद्रमा की सतह तक मून बग्गी पहुंचाएंगे।
चंद्र वाहनों का विकास एस्ट्रोलैब और लूनर आउटपोस्ट द्वारा किया जाएगा। वहीं फायरफ्लाई एयरोस्पेस ‘मूनफॉल’ मिशन के तहत ऐसे अंतरिक्ष यान बनाएगी जो पृथ्वी की कक्षा से ड्रोन को चंद्रमा तक पहुंचा सकें। नासा को उम्मीद है कि ये प्रणालियां 2028 तक आर्टेमिस अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी से पहले तैयार हो जाएंगी।
दीर्घकालिक मून बेस योजना
नासा का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सैकड़ों वर्ग मील क्षेत्र में फैला एक विशाल चंद्र आधार बनाना है। इसमें आवासीय मॉड्यूल, ऊर्जा प्रणालियां, प्रयोगशालाएं, परिवहन वाहन और अनुसंधान सुविधाएं शामिल होंगी। अंतरिक्ष यात्री वहां कई सप्ताह या महीनों तक रह सकेंगे।
नासा के मून बेस कार्यक्रम के कार्यकारी अधिकारी कार्लोस गार्सिया-गैलान ने बताया कि ‘मूनफॉल’ नामक ड्रोन चंद्र आधार की परिधि की निगरानी करेंगे। नासा अधिकारियों के अनुसार, इससे आसपास काम कर रहे अन्य देशों के अंतरिक्ष यानों या उपकरणों से किसी प्रकार का हस्तक्षेप रोका जा सकेगा।
आर्टेमिस कार्यक्रम के तीन चरण
नासा अगले दशक में तीन प्रमुख चरणों में इस चंद्र आधार का निर्माण करना चाहता है। पहले चरण में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतारने और रोबोटिक प्रणालियों की तैनाती पर ध्यान दिया जाएगा।
अगले वर्ष प्रस्तावित आर्टेमिस-III मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में नासा के ओरियन कैप्सूल के साथ डॉकिंग का अभ्यास करेंगे। चालक दल को चंद्रमा तक पहुंचाने वाले लैंडर का विकास एलन मस्क की स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन कर रही हैं। नासा को उम्मीद है कि आर्टेमिस-IV मिशन के अंतरिक्ष यात्री 2028 तक चंद्रमा पर उतर सकते हैं।
आइजैकमैन ने कहा, “जो लोग धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह महान वापसी अब बहुत करीब है और हम अपनी गति धीमी नहीं करेंगे। हम तो अभी केवल शुरुआत कर रहे हैं।”
दूसरा चरण, जो 2020 के दशक के अंत और 2030 के दशक की शुरुआत के बीच पूरा होने की उम्मीद है, ऊर्जा प्रणालियों, परिवहन नेटवर्क और चंद्रमा से संसाधन निकालने की तकनीकों जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित होगा।
तीसरे चरण में, जो 2032 के बाद शुरू होने की संभावना है, ऐसे उन्नत स्थायी आवास विकसित किए जाएंगे जहां मनुष्य अर्ध-स्थायी रूप से रह सकेंगे।
गार्सिया-गैलान ने कहा, “तब हम यह कह सकेंगे कि हम यहां स्थायी रूप से मौजूद हैं और इसे छोड़ने वाले नहीं हैं।”
नासा चंद्रमा पर स्थायी आधार क्यों बनाना चाहता है?
नासा चंद्रमा को मंगल ग्रह पर भविष्य के मानव मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र के रूप में देखता है। वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री यहां आवासीय प्रणालियों, जीवन-समर्थन तकनीकों और गहरे अंतरिक्ष में उपयोग होने वाली तकनीकों का परीक्षण करेंगे, ताकि मंगल पर लंबी अवधि के मिशनों की तैयारी की जा सके।
मून बेस अमेरिका को वैज्ञानिक अनुसंधान, मूल्यवान संसाधनों के खनन और तेजी से बढ़ती वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने में भी मदद कर सकता है।
चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि वहां जमी हुई बर्फ के रूप में पानी मौजूद है। यह पानी भविष्य में पीने योग्य जल, ऑक्सीजन और यहां तक कि रॉकेट ईंधन का स्रोत बन सकता है।
तेज हो रही है वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा
चंद्र अन्वेषण के क्षेत्र में अमेरिका को चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। चीन 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने और 2030 के दशक में रूस के साथ मिलकर अपना अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन विकसित करने की योजना बना रहा है।
इस वर्ष की शुरुआत में एलन मस्क ने कहा था कि स्पेसX ने फिलहाल मंगल ग्रह की तुलना में चंद्रमा पर आत्मनिर्भर शहर बसाने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।
फरवरी में X पर लिखे एक पोस्ट में मस्क ने कहा, “जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दूं कि स्पेसएक्स ने पहले ही चंद्रमा पर स्वयं विकसित होने वाले शहर के निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है, क्योंकि इसे हम 10 वर्षों से कम समय में हासिल कर सकते हैं, जबकि मंगल पर ऐसा करने में 20 वर्ष से अधिक समय लग सकता है।”
हालांकि, नासा का चंद्र कार्यक्रम अभी भी काफी हद तक स्पेसएक्स के स्टारशिप ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम पर निर्भर है, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। अब तक इस अंतरिक्ष यान को कई तकनीकी चुनौतियों और देरी का सामना करना पड़ा है।
