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ईरान युद्ध ने स्पिरिट एयरलाइंस के बंद होने में कैसे भूमिका निभाई?
34 वर्षों के बाद स्पिरिट एयरलाइंस ने अपना संचालन बंद कर दिया, क्योंकि ईरान युद्ध से जुड़ी बढ़ती ईंधन कीमतों ने इस बजट एयरलाइन को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया।

स्पिरिट एयरलाइंस ने तीन दशकों से अधिक समय तक सेवाएं देने के बाद अचानक अपनी सभी उड़ानें बंद कर दी हैं। एयरलाइन ने सभी फ्लाइट्स रद्द कर दीं और तुरंत बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। एक बयान में कंपनी ने यात्रियों को सूचित किया: “हमारे यात्रियों के लिए: सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, और ग्राहक सेवा अब उपलब्ध नहीं है।”

एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसने बढ़ते वित्तीय दबाव के बावजूद संचालन जारी रखने की कोशिश की, लेकिन स्थिति अस्थिर हो गई।

हजारों यात्री और नौकरियां प्रभावित

इस अचानक बंदी से हजारों यात्री फंस गए हैं। वहीं, करीब 17,000 कर्मचारियों के सामने अब नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। यह पतन हाल के अमेरिकी विमानन इतिहास की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक माना जा रहा है।

वित्तीय संकट और गहराया

स्पिरिट पहले से ही आर्थिक दबाव में थी। 2024 से अब तक उसने दो बार दिवालियापन के लिए आवेदन किया था और नए निवेश की तलाश के साथ अपने कारोबार का पुनर्गठन कर रही थी।

हालांकि, अमेरिकी सरकार, कर्जदाताओं और बॉन्डहोल्डर्स के साथ अंतिम चरण की बातचीत विफल हो गई। वित्तीय सहायता न मिलने के कारण एयरलाइन अपना संचालन जारी नहीं रख सकी।

ईरान युद्ध से ईंधन कीमतों में उछाल

ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि हुई।

इस संघर्ष ने ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली शिपिंग पर असर डाला, जो दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है।

इसके चलते जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघर्ष बढ़ने के बाद कीमतें लगभग दोगुनी हो गईं।

स्पिरिट को उम्मीद थी कि 2026 में ईंधन की कीमत लगभग 2.24 डॉलर प्रति गैलन रहेगी, लेकिन यह बढ़कर 4.30 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ा।

सबसे ज्यादा प्रभावित हुई बजट एयरलाइंस

तेल आपूर्ति और शिपिंग में बाधा के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कमी हो गई। दुनिया भर की एयरलाइंस ने उड़ानें कम कीं, टिकट कीमतें बढ़ाईं और अतिरिक्त शुल्क लगाए।

हालांकि, स्पिरिट जैसी लो-कॉस्ट एयरलाइंस सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। उनका बिजनेस मॉडल सस्ते किराए और अधिक यात्रियों पर निर्भर करता है, जिससे बढ़ती लागत को संभालने की गुंजाइश कम रहती है।

विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईंधन की कीमतें ऊंची रहीं तो छोटी एयरलाइंस बंद हो सकती हैं।

राहत प्रयास विफल

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पिरिट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से लगभग 500 मिलियन डॉलर के बेलआउट की मांग की थी। शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन राजनीतिक विरोध और कर्जदाताओं के समर्थन की कमी के कारण यह योजना विफल हो गई।

स्पिरिट के सीईओ डेव डेविस ने माना कि कंपनी पर्याप्त फंड जुटाने में असफल रही।

उन्होंने कहा, “व्यवसाय को बनाए रखने के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर की अतिरिक्त नकदी की जरूरत थी, जो स्पिरिट के पास नहीं थी और वह इसे जुटा भी नहीं सकी।”

फंसे यात्रियों के लिए सहायता

एयरलाइन ने ग्राहकों को एयरपोर्ट न जाने की सलाह दी है। साथ ही, कार्ड के जरिए की गई बुकिंग के लिए रिफंड स्वतः प्रक्रिया के तहत दिए जाएंगे।

अमेरिकी परिवहन विभाग ने कहा कि बड़ी एयरलाइंस प्रभावित यात्रियों की मदद करेंगी। यूनाइटेड एयरलाइंस, डेल्टा एयर लाइंस, जेटब्लू और साउथवेस्ट एयरलाइंस जैसी कंपनियां सीमित किराए और सहायता प्रदान करेंगी।

एक बड़ी बजट एयरलाइन का अंत

स्पिरिट की शुरुआत मिशिगन में एक ट्रकिंग कंपनी के रूप में हुई थी, जिसने 1980 के दशक में एविएशन सेक्टर में प्रवेश किया। समय के साथ यह अमेरिका की सबसे प्रसिद्ध अल्ट्रा-लो-कॉस्ट एयरलाइंस में से एक बन गई। अपने चरम पर कंपनी का मूल्य लगभग 6 बिलियन डॉलर था।

अब इसका बंद होना यह दिखाता है कि वैश्विक संघर्ष और बढ़ती ऊर्जा कीमतें युद्ध क्षेत्र से दूर उद्योगों को भी कितनी तेजी से प्रभावित कर सकती हैं।