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फॉरेंसिक जांच में खुलासा: पहलगाम हमला प्रधानमंत्री मोदी को सीधा संदेश देने के लिए किया गया था
फॉरेंसिक सबूत बताते हैं कि पहलगाम हमला लश्कर द्वारा योजनाबद्ध था, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी को सीधा धमकी भरा संदेश देना था।

पहलगाम नरसंहार में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों से बरामद मोबाइल फोन की डिजिटल फॉरेंसिक जांच से संकेत मिलता है कि यह हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधा और हिंसक संदेश देने के लिए किया गया था।

जांचकर्ताओं ने पाया कि यह संदेश 16 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के भाषण के तुरंत बाद सामने आया। इसके छह दिन बाद हमला हुआ, जो बयानबाज़ी और हिंसा के बीच संभावित संबंध की ओर इशारा करता है।

आतंकी उपकरणों से मिले धमकी भरे संदेश

बरामद फोन में से एक आतंकी हमजा अफगानी का था। इस डिवाइस से मिले डेटा में एक और हमले की धमकी मिली। फोन पर एक बैनर लिखा था: “मोदी, तेरा बाप आया (Modi your father has come)। अबू हमजा (जिहादियों के लिए सामान्य नाम)। ग्रुप—IDH (इंडियन डॉग हंटर्स)।”

रिकॉर्ड्स के अनुसार, हमजा 2024 में गुरेज सेक्टर की तुलैल घाटी के जरिए भारत में दाखिल हुआ था। बाद में वह गांदरबल क्षेत्र में दूसरे ऑपरेटिव फैसल जट्ट के साथ जुड़ गया। भारतीय सेना के पैरा-कमांडो ने 28 जुलाई 2025 को ऑपरेशन महादेव के दौरान हमजा को मार गिराया।

बचे हुए लोगों के बयान से मंशा का खुलासा

जांच में पहलगाम से बचे एक परिवार के बयान का भी जिक्र है। पल्लवी नाम की महिला और उनके बेटे अभिजेय को हमले के दौरान छोड़ दिया गया, जबकि उनके पति मंजूनाथ की हत्या कर दी गई।

पल्लवी के अनुसार, हमलावरों ने उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाने की बात कही, लेकिन उनसे मोदी तक संदेश पहुंचाने को कहा। यह परिवार छुट्टी मनाने के लिए शिवमोग्गा से आया था, जब बैसरन घाटी में हमला हुआ।

नेटवर्क और पुराने हमलों का सुराग

जांच एजेंसियों ने पाया कि फैसल जट्ट नियंत्रण रेखा के पार मौजूद एक हैंडलर सज्जिद जट्ट के निर्देश पर काम कर रहा था। वह पहले 4 मई 2024 को सशिथर में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमले में भी शामिल था।

इसके बाद यह समूह जुलाई 2024 में पुंछ-राजौरी क्षेत्र से कश्मीर घाटी में पहुंचा। सुरक्षा बलों ने 3 दिसंबर 2024 को डाचीगाम में एक ऑपरेशन के दौरान सुलेमान शाह से मुठभेड़ की, जिसमें एक अन्य आतंकी जुनैद मारा गया।

जब्त किए गए फोन से मिले डेटा से पता चला कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों ने स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन्होंने हमलावरों को पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाने, उनकी पहचान की पुष्टि करने और खास तौर पर भारतीय नागरिकों को मारने के आदेश दिए थे।

भारत की प्रतिक्रिया और आतंकवाद के खिलाफ रुख

रिपोर्ट में आतंकवादी हमलों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के पैटर्न का भी जिक्र है। इसमें उरी सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक (ऑपरेशन बंदर) और पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों का उल्लेख किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को कई बार स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा: “हम घर में घुसेंगे भी और मारेंगे भी।”

जारी चिंताएं

इन निष्कर्षों से सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क के लगातार खतरे और पाकिस्तान से संचालित हैंडलरों की भूमिका उजागर होती है। यह भी स्पष्ट होता है कि ऐसे हमले केवल हिंसा के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से भी योजनाबद्ध होते हैं।