हंगरी में पीटर माज्यार ने लंबे समय से प्रधानमंत्री रहे विक्टर ओर्बान को हराकर बड़ा राजनीतिक बदलाव ला दिया है। रविवार शाम बुडापेस्ट में उत्साहित भीड़ को संबोधित करते हुए माज्यार ने जीत का जश्न मनाया और कहा, “हमने मिलकर ओर्बान शासन को बदल दिया, हमने मिलकर हंगरी को आज़ाद किया। हमने अपना देश वापस ले लिया।”
उन्होंने इस जीत के पैमाने को असाधारण बताया। उन्होंने कहा, “यह जीत चाँद से भी दिखाई दे सकती है और हंगरी की हर खिड़की से भी।” उन्होंने रिकॉर्ड मतदान पर भी जोर दिया और कहा, “लोकतांत्रिक हंगरी के इतिहास में कभी इतने लोगों ने मतदान नहीं किया, और किसी भी पार्टी को इतना बड़ा जनादेश पहले कभी नहीं मिला।”
तिस्ज़ा पार्टी को भारी बहुमत
माज्यार तिस्ज़ा पार्टी का नेतृत्व करते हैं, जिसने भारी जीत हासिल की है। शुरुआती नतीजों के अनुसार, पार्टी को संसद में दो-तिहाई से अधिक सीटों के साथ सुपरमेज़ोरिटी मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए बताया कि उनकी पार्टी को 33 लाख वोट मिले। यह हंगरी के इतिहास में किसी भी पार्टी को मिले सबसे अधिक वोट हैं।नतीजे साफ होते ही ओर्बान ने हार स्वीकार कर ली। माज्यार ने यह भी बताया, “प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने अभी मुझे फोन करके हमारी जीत पर बधाई दी है।”
97.35% वोटों की गिनती पूरी होने तक तिस्ज़ा पार्टी ने 199 में से 138 सीटें जीत ली थीं। इसके मुकाबले ओर्बान की फिदेस पार्टी को सिर्फ 55 सीटें मिलीं।
यूरोप के साथ रिश्ते सुधारने का वादा
अपने भाषण में माज्यार ने यूरोपीय संघ के साथ हंगरी के रिश्ते बेहतर करने का वादा किया, जो ओर्बान के नेतृत्व में तनावपूर्ण हो गए थे।
उन्होंने कहा, “हंगरी के लोगों ने यूरोप के पक्ष में ‘हाँ’ कहा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी सरकार हंगरी को फिर से यूरोपीय संघ की न्यायिक प्रणाली से जोड़ेगी और यूरोपीय संघ तथा नाटो दोनों के साथ संबंध मजबूत करेगी।
माज्यार ने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी यात्रा योजनाएं भी साझा कीं। वे सबसे पहले पोलैंड जाएंगे, इसके बाद विएना और फिर ब्रसेल्स, जहां यूरोपीय संसद की बैठक होती है।
माज्यार ने कहा, “हंगरी पिछले 1000 वर्षों से यूरोप का हिस्सा है और आगे भी वहीं रहेगा।”
यूरोपीय संघ और वैश्विक राजनीति पर असर
ओर्बान की हार से यूरोपीय संघ के भीतर बड़े बदलाव आ सकते हैं। उनके नेतृत्व में हंगरी अक्सर यूरोपीय संघ की नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाता था। अब यह बदलाव वित्तीय सहायता का रास्ता खोल सकता है, जिसमें यूक्रेन के लिए पहले रोका गया 90 अरब यूरो का ऋण भी शामिल है।
इससे यूरोपीय संघ के वे फंड भी जारी हो सकते हैं जो ओर्बान सरकार के दौरान लोकतांत्रिक मानकों को लेकर चिंताओं के कारण रोक दिए गए थे।
वैश्विक स्तर पर भी इस नतीजे का असर पड़ सकता है। इससे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिन्हें यूरोपीय संघ के भीतर ओर्बान के रूप में एक सहयोगी मिलता था। इसका असर पश्चिम के दक्षिणपंथी राजनीतिक समूहों पर भी पड़ सकता है, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक शामिल हैं।
हंगरी में सुधारों की उम्मीद
हंगरी के भीतर माज्यार की जीत बड़े सुधारों का रास्ता खोल सकती है। उनकी पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और न्यायपालिका तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की स्वतंत्रता बहाल करने का वादा किया है।
यह चुनाव देश के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है, जिसने 16 साल के राजनीतिक दौर का अंत कर दिया है और हंगरी के शासन में एक नए अध्याय की शुरुआत की है।
