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अमेरिका-इज़राइल हमलों में ईरान का साउथ पार्स गैस फील्ड निशाने पर, तनाव बढ़ा
अमेरिका और इज़राइल के ताज़ा हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण गैस क्षेत्र साउथ पार्स को निशाना बनाया गया है, जबकि तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से जुड़ी युद्धविराम शर्तों को खारिज कर दिया है।

ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड की ऊर्जा सुविधाओं पर सोमवार को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए ताज़ा मिसाइल हमलों में निशाना बनाया गया। यह जानकारी ईरान के सरकारी मीडिया ने दी है।

यह इस स्थल पर पहला हमला नहीं है। पिछले महीने भी इज़राइल ने इस गैस फील्ड को निशाना बनाया था, जिससे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था। उस हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा केंद्रों पर हमला किया था, जिनमें कतर का रास लाफ़ान एलएनजी कॉम्प्लेक्स भी शामिल था।

दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र पर खतरा

साउथ पार्स फील्ड खाड़ी के नीचे स्थित है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार माना जाता है। यह ईरान और कतर के बीच साझा है।

ईरान की ओर इसे साउथ पार्स कहा जाता है, जबकि कतर की ओर इसे नॉर्थ फील्ड या नॉर्थ डोम के नाम से जाना जाता है। ईरान अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए इस पर काफी निर्भर है, जबकि कतर इससे निकली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को वैश्विक बाजारों में निर्यात करता है।

जॉर्डन में विस्फोट की खबर

इस बीच तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मुख्यालय के पास कई विस्फोटों की खबर मिली है। इस घटना से संकेत मिलता है कि संघर्ष पूरे क्षेत्र में और फैल सकता है।

ईरान ने युद्धविराम की शर्त ठुकराई

रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान को युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह “अस्थायी युद्धविराम” के बदले होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोलेगा।

प्रस्ताव पर अब भी चर्चा जारी

सूत्रों के अनुसार ईरान और अमेरिका दोनों के सामने लड़ाई रोकने का एक प्रस्ताव रखा गया है। यह योजना जल्द लागू हो सकती है और इससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता बन सकता है।

हालांकि मुख्य शर्तों पर मतभेद अभी भी किसी समझौते में देरी कर रहे हैं।

स्थिति अब भी तनावपूर्ण

स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर हमले और रुकी हुई युद्धविराम वार्ताएं व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के खतरे को बढ़ा रही हैं, जिसका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।