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‘राइज़’ से मिलिए: नासा के आर्टेमिस-II के साथ उड़ता प्लश मैस्कॉट
नासा का आर्टेमिस-II मिशन प्रक्षेपण के बाद कक्षा में पहुंच गया। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के साथ “राइज़” नाम का एक विशेष जीरो-ग्रैविटी मैस्कॉट भी अंतरिक्ष में ले जाया गया है।

आर्टेमिस-II ने चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। अंतरिक्ष यान ने गुरुवार (2 अप्रैल, IST) को केनेडी स्पेस सेंटर से सफल प्रक्षेपण के बाद अपनी प्रारंभिक कक्षा हासिल कर ली।

नासा ने इस ऐतिहासिक मिशन के लिए अपने शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट का उपयोग किया, जिसने चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पहुंचाया। क्रू में कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच, और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।

यह मिशन 50 से अधिक वर्षों में चंद्रमा की ओर जाने वाली पहली मानवयुक्त आर्टेमिस यात्रा है।

एक खास पांचवां यात्री भी साथ

जहां दुनिया भर का ध्यान अंतरिक्ष यात्रियों पर था, वहीं ओरायन कैप्सूल में एक अनोखा पांचवां यात्री भी मौजूद था—एक छोटा सा प्लश खिलौना, जिसका नाम “राइज़” है।

‘राइज़’ क्या है?

राइज़ एक जीरो-ग्रैविटी इंडिकेटर है। यह एक छोटा सा वस्तु होती है जिसे अंतरिक्ष मिशनों में यह दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है कि कब अंतरिक्ष यान में भारहीनता (वेटलेसनेस) शुरू होती है। जैसे ही अंतरिक्ष यान शून्य गुरुत्वाकर्षण में पहुंचता है, यह खिलौना स्वतंत्र रूप से तैरने लगता है।

इस प्लश खिलौने का डिज़ाइन भी खास अर्थ रखता है। यह अपोलो-8 मिशन के दौरान ली गई प्रसिद्ध “अर्थराइज़” तस्वीर को श्रद्धांजलि देता है।

दिलचस्प बात यह है कि राइज़ को किसी वैज्ञानिक या इंजीनियर ने नहीं बनाया। इसे कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू के 8 वर्षीय अंतरिक्ष प्रेमी लुकास ये ने मून मैस्कॉट प्रतियोगिता के तहत डिजाइन किया था।

डिज़ाइन और प्रतीकात्मकता

राइज़ एक मुस्कुराते हुए सफेद चंद्रमा जैसा दिखता है। इसके सिर पर एक टोपी है जो पृथ्वी का प्रतीक है। इसमें काला वाइज़र है और तारों से भरे पृष्ठभूमि में छोटे अंतरिक्ष यान उड़ते हुए दिखाई देते हैं।

28 मार्च को केनेडी स्पेस सेंटर में इसके अनावरण के दौरान क्रिस्टीना कोच ने इसकी अहमियत बताते हुए कहा,
“यह ऐसा मिशन है जो किसी तरह हमारी अपनी यात्रा को भी दर्शाता है।”

जीरो-ग्रैविटी इंडिकेटर की भूमिका

राइज़ की अंतरिक्ष यान में एक महत्वपूर्ण भूमिका है। यह अंतरिक्ष यात्रियों को यह पहचानने में मदद करता है कि वे कब शून्य गुरुत्वाकर्षण में प्रवेश कर चुके हैं।

लॉन्च के बाद पहले आठ मिनट तक तेज बल के कारण अंतरिक्ष यात्री और खिलौना दोनों अपनी सीटों पर दबे रहते हैं। जैसे ही अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में पहुंचता है, अंतरिक्ष यात्री तो सीट बेल्ट से बंधे रहते हैं, लेकिन राइज़ तैरने लगता है, जिससे भारहीनता का संकेत मिलता है।

एक प्रतीकात्मक पेलोड

यह खिलौना केवल प्रतीकात्मक ही नहीं है। इसके अंदर एक छोटा सा खंड है जिसमें माइक्रोSD कार्ड रखा गया है। इसमें उन लाखों लोगों के नाम दर्ज हैं जिन्होंने इस डिज़ाइन प्रतियोगिता में भाग लिया था। इससे दुनिया भर के लोग इस मिशन से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं।

कमांडर रीड वाइसमैन ने ऐसे प्रतीकों के मानवीय पहलू को रेखांकित किया। उन्होंने कहा,
“गहरे अंतरिक्ष में क्रू को जीवित रखने वाले जटिल उपकरणों से भरे अंतरिक्ष यान में यह इंडिकेटर एक दोस्ताना और उपयोगी तरीका है, जो ब्रह्मांड की हमारी खोज में मानवीय तत्व को उजागर करता है।”

वैश्विक प्रतियोगिता से चुना गया मैस्कॉट

राइज़ को 50 से अधिक देशों से आई हजारों प्रविष्टियों में से चुना गया। नासा ने पहले 25 डिज़ाइनों को शॉर्टलिस्ट किया और फिर उन्हें घटाकर पांच फाइनलिस्ट तक सीमित किया, जिसके बाद विजेता का चयन किया गया।

अन्य फाइनलिस्ट में “बिग स्टेप्स ऑफ लिटिल ऑक्टोपस,” “कोरी द एक्सप्लोरर,” “क्रिएशन मिथोस,” और “लेपस द मून रैबिट” जैसे रचनात्मक डिज़ाइन शामिल थे।

जीरो-ग्रैविटी इंडिकेटर की परंपरा

जीरो-ग्रैविटी इंडिकेटर साथ ले जाने की परंपरा 1961 से शुरू हुई थी। उस समय यूरी गगारिन ने वोस्तोक-1 मिशन में एक छोटी गुड़िया अपने साथ ले गए थे।

तब से अंतरिक्ष यात्री भारहीनता के क्षण को दर्शाने के लिए कई प्रतीकात्मक वस्तुएं अंतरिक्ष में ले जाते रहे हैं, जिनमें बेबी योदा और स्नूपी जैसे लोकप्रिय पात्र भी शामिल हैं।