रिपोर्टों के अनुसार, इटली ने मध्य पूर्व की ओर जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला नाटो सहयोगी की ओर से अमेरिका के लिए एक दुर्लभ झटका माना जा रहा है।
इतालवी अखबार कोरिएरे डेला सेरा के अनुसार, यह कदम क्षेत्र में तैनाती के लिए भेजे जाने वाले “कुछ अमेरिकी बमवर्षक विमानों” से जुड़ा है।
अनुमति नियमों के कारण इनकार
नेवल एयर स्टेशन सिगोनेला नाटो और अमेरिकी अभियानों के लिए एक अहम केंद्र है। हालांकि इतालवी अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक अनुमति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
मौजूदा समझौतों के अनुसार, इटली की जमीन पर स्थित सैन्य ठिकानों पर किसी भी अमेरिकी सैन्य गतिविधि से पहले रोम से औपचारिक परामर्श आवश्यक होता है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने पहले से अनुमति नहीं मांगी और न ही इटली के सैन्य नेतृत्व को सूचित किया, जिसके कारण यह अनुमति नहीं दी गई।
अब तक इटली के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
स्पेन ने भी अपनाया ऐसा ही रुख
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब हाल ही में स्पेन ने भी ईरान से जुड़े अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने कहा, “इन ठिकानों के उपयोग की अनुमति नहीं है और निश्चित रूप से ईरान के युद्ध से संबंधित किसी भी कार्रवाई के लिए स्पेनिश एयरस्पेस के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं है।”
अमेरिकी अभियानों के सामने लॉजिस्टिक चुनौतियां
स्पेन के फैसले ने अमेरिकी सैन्य योजनाओं को जटिल बना दिया है। एल पाइस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी बमवर्षक विमानों को अपने मार्ग और यात्रा योजनाओं में बदलाव करना पड़ा है। केवल आपातकालीन लैंडिंग ही अपवाद रहेगी।
सांचेज़ ने युद्ध का विरोध किया
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ इस संघर्ष का विरोध करने वाले पश्चिमी नेताओं में सबसे मुखर रहे हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमलों के बाद शुरू हुआ था और तब से पूरे क्षेत्र में तेजी से बढ़ गया है।
अमेरिका और स्पेन के बीच तनाव बढ़ा
सांचेज़ के रुख की व्हाइट हाउस ने आलोचना की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संभावित व्यापारिक परिणामों की चेतावनी दी है और स्पेन की आलोचना की है कि उसने वाशिंगटन की मांग के अनुसार नाटो रक्षा खर्च को जीडीपी के पाँच प्रतिशत तक नहीं बढ़ाया।
