कोविड-19 का एक नया सबवेरिएंट BA.3.2, जिसे आमतौर पर ‘सिकाडा’ कहा जा रहा है, कई देशों में पाया गया है, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है। इस वेरिएंट ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा है, क्योंकि स्वास्थ्य एजेंसियां इसके व्यवहार और संभावित प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह वेरिएंट अब तक 20 से अधिक देशों में पाया जा चुका है। हालांकि फिलहाल भारत में इस सबवेरिएंट से जुड़े मामलों में कोई वृद्धि नहीं देखी गई है। अधिकारी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
सिकाडा वेरिएंट क्या है?
BA.3.2 कोविड-19 के ओमिक्रॉन परिवार का हिस्सा है। इसे अलग बनाने वाली बात इसमें पाए जाने वाले असामान्य रूप से अधिक म्यूटेशन हैं।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस वेरिएंट में लगभग 70 से 75 म्यूटेशन हैं, जिनमें से कई स्पाइक प्रोटीन में हैं। वायरस का यही हिस्सा उसे मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है। इन बदलावों के कारण यह वेरिएंट अधिक तेजी से फैल सकता है और आंशिक रूप से प्रतिरक्षा से बच सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा म्यूटेशन होने का मतलब यह नहीं है कि वायरस अधिक खतरनाक ही होगा।
वैश्विक स्तर पर निगरानी
सिकाडा वेरिएंट अमेरिका में पाया गया है और वहां इसकी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में भी इसके मामले सामने आए हैं।
अब तक इस वेरिएंट से जुड़े बड़े स्तर के प्रकोप के संकेत नहीं मिले हैं। फिर भी कई क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी के कारण वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां इस पर कड़ी नजर रख रही हैं।
लक्षण ओमिक्रॉन जैसे
BA.3.2 से जुड़े लक्षण पहले के ओमिक्रॉन वेरिएंट जैसे ही दिखाई दे रहे हैं। आम लक्षणों में बुखार, थकान, गले में खराश, खांसी और नाक बहना या बंद होना शामिल हैं।
कुछ लोगों में सिरदर्द, शरीर में दर्द और हल्की सांस लेने में परेशानी भी देखी गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि यह वेरिएंट पहले के स्ट्रेन्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा करता है।
तेजी से फैलने और प्रतिरक्षा से बचने की चिंता
सिकाडा वेरिएंट को लेकर मुख्य चिंता यह है कि क्या यह ज्यादा तेजी से फैल सकता है या प्रतिरक्षा को चकमा दे सकता है।
शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि यह वेरिएंट अधिक संक्रामक हो सकता है और कुछ हद तक प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता रखता है। इसका मतलब यह है कि टीका लगवा चुके या पहले संक्रमित हो चुके लोग भी दोबारा संक्रमित हो सकते हैं।
हालांकि गंभीर बीमारी से सुरक्षा मजबूत रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि आंकड़े अभी विकसित हो रहे हैं और आगे के शोध के साथ निष्कर्ष बदल सकते हैं।
क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?
फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तुरंत चिंता की कोई वजह नहीं है।
निगरानी प्रणाली नए वेरिएंट्स पर नजर रख रही है और BA.3.2 से जुड़ी किसी बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट नहीं आई है। टीके अभी भी गंभीर बीमारी से सुरक्षा देने की उम्मीद रखते हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने जीनोम सीक्वेंसिंग जारी रखने, अस्पतालों के रुझानों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज लेने की सलाह दी है।
यह वेरिएंट अलग क्यों है
BA.3.2 को लेकर मुख्य मुद्दा इसकी गंभीरता नहीं बल्कि इसके बारे में अनिश्चितता है।
पहले के वेरिएंट्स की तरह वैज्ञानिकों को इसके वास्तविक प्रभाव को समझने में समय लग सकता है। इसलिए सरकारें सतर्क रहते हुए स्थिति पर नजर बनाए रख रही हैं, लेकिन घबराहट पैदा करने से बच रही हैं।
फिलहाल सिकाडा वेरिएंट को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है, डरने की नहीं। इसके अधिक म्यूटेशन और कई देशों में मौजूदगी पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि यह अधिक गंभीर है या भारत के लिए बड़ा खतरा बनता है।
