JUSZnews

NEWS WITHOUT INTERRUPTION

Subscribe
बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर में भगदड़, आठ लोगों की मौत
बिहार के एक भीड़भाड़ वाले शीतला माता मंदिर में भगदड़ मचने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने इस हादसे के लिए खराब भीड़ प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

मंगलवार को शीतला माता मंदिर में मची भगदड़ में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए। यह घटना नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र में हुई।

मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। आमतौर पर मंगलवार को यहां भारी भीड़ होती है, लेकिन इस बार चैत माह का आखिरी मंगलवार होने के कारण भीड़ और अधिक थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरने वालों में आठ महिलाएं शामिल हैं।

भीड़ बढ़ने से मचा हड़कंप

जब भीड़ बेकाबू हो गई तो स्थिति अचानक अफरातफरी में बदल गई। श्रद्धालु जल्दी आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, जिससे घबराहट फैल गई और भगदड़ मच गई। बाहर निकलने की कोशिश में कई लोग भीड़ में फंस गए।

प्रशासन ने दो मृतकों की पहचान रीता देवी (50), पत्नी दिनेश रजक, और रेखा देवी (45), पत्नी कमलेश प्रसाद, निवासी मथुरापुर नूरसराय के रूप में की है।

घायलों को अस्पताल भेजा गया, मंदिर बंद

बचाव दल ने घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में पहुंचाया। बाद में कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए बड़े चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित किया गया। घटना के बाद अधिकारियों ने मंदिर परिसर को खाली कराया। आगे किसी जोखिम से बचने के लिए मंदिर और उससे जुड़े मेले को भी बंद कर दिया गया।

सरकार ने जांच के आदेश दिए

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने पटना मंडल के आयुक्त और रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 6 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की।

पुलिस की देरी से पहुंचने के आरोप

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा में कई कर्मियों की तैनाती होने के कारण वे देर से घटनास्थल पर पहुंचे। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।

भगदड़ का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि स्थानीय लोगों ने खराब भीड़ प्रबंधन और पुलिस की कमी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

त्योहार के कारण बढ़ी भारी भीड़

बिहार शरीफ के पास स्थित इस मंदिर में चैत माह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। विशेष रूप से शीतला अष्टमी के दिन भक्त एक दिन पहले बना ठंडा भोजन चढ़ाते हैं और चूल्हा नहीं जलाते। इस दौरान मंदिर में लंबी कतारें आम बात होती हैं।

श्रद्धालुओं ने कुप्रबंधन को ठहराया जिम्मेदार

प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रशासन की लापरवाही को हादसे के लिए जिम्मेदार बताया।

ममता देवी ने कहा, “मंगलवार को यहां हमेशा भीड़ रहती है। लोग शीतला माता के दर्शन के लिए आते हैं। हम भी पटना से दर्शन के लिए आए थे। लेकिन अचानक भगदड़ मच गई और लोगों की मौत हो गई। यह सब कुप्रबंधन के कारण हुआ। एंबुलेंस तो आ गई थी, लेकिन प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा था।”

रीना राय ने कहा, “हमें पता चला कि कुछ लोग बेहोश हो गए और कुछ घायल हो गए। कुछ लोगों की मौत की भी खबर मिली। भगदड़ इसलिए हुई क्योंकि कोई भी लाइन में खड़ा नहीं रहना चाहता था और हर कोई पहले दर्शन करना चाहता था। यह चैत का आखिरी मंगलवार था। यह सब कुप्रबंधन की वजह से हुआ।”

स्थानीय निवासी ललित कुमार ने कहा, “आज महावीर जयंती और मंगलवार है, इसलिए वहां बहुत भीड़ थी। बैरिकेड टूट गए और अचानक भगदड़ मच गई। लोग कह रहे हैं कि कई लोग कुचले गए और मौतें हुईं। लोग यह भी कह रहे हैं कि वहां पुलिस मौजूद नहीं थी।”

सरकार ने जताया शोक

बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना को दुखद बताया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा, “इस हादसे में जिन श्रद्धालुओं की मौत हुई और जो घायल हुए हैं, उनके परिवारों के प्रति मैं गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से हर संभव सहायता और राहत दी जा रही है। घायलों के उचित इलाज की व्यवस्था की गई है।”