ऑस्ट्रेलिया में अधिकारियों ने कुछ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को मुफ्त करने का फैसला किया है। यह कदम बढ़ती ईंधन कीमतों से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए उठाया गया है, जो पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़ी हैं।
विक्टोरिया राज्य, जिसमें मेलबर्न शामिल है, अप्रैल महीने के दौरान ट्रेन, ट्राम और बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देगा। तस्मानिया में भी सोमवार से जून के अंत तक किराया नहीं लिया जाएगा।
निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की कोशिश
इस कदम का मुख्य उद्देश्य निजी वाहनों के उपयोग को कम करना है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पेट्रोल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। इसका असर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर भी पड़ा है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।
विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा एलन ने कहा कि यह फैसला लोगों को तुरंत राहत देगा।
उन्होंने कहा, “यह हर समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन अभी के लिए विक्टोरियावासियों की मदद के लिए एक त्वरित कदम है।”
तस्मानिया में प्रीमियर जेरेमी रॉकलिफ ने कहा कि यह कदम बढ़ती ईंधन कीमतों से जूझ रहे परिवारों को सहारा देगा। इस योजना में मुफ्त स्कूल बस सेवाएं भी शामिल हैं, जिससे यात्रियों को हर हफ्ते अधिक बचत होगी।
अन्य राज्यों का अलग रुख
ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों ने मुफ्त परिवहन का विकल्प नहीं अपनाया है।
न्यू साउथ वेल्स में परिवहन मंत्री जॉन ग्राहम ने कहा कि सरकार संसाधनों को बचाना चाहती है, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर लंबे समय तक दबाव रहने की आशंका है।
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए यात्रा रियायतों का विस्तार किया है, साथ ही बढ़ती ईंधन लागत को भी कवर किया जा रहा है। क्वींसलैंड ने अपने मौजूदा कम फ्लैट किराया सिस्टम को ही पर्याप्त बताया है।
वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि वहां किराए पहले से ही कम हैं। प्रीमियर रोजर कुक ने बताया कि किराए ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर हैं।
पूरे ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों में उछाल
ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। औसत पेट्रोल कीमत बढ़कर लगभग A$2.38 प्रति लीटर हो गई है, जो संघर्ष शुरू होने के समय करीब A$2.09 थी।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार ने कहा कि ईंधन की आपूर्ति स्थिर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कीमतों में वृद्धि का कारण वैश्विक बाजार का दबाव है, न कि आपूर्ति की कमी।
ऊर्जा संकट का वैश्विक असर
इस संकट का प्रभाव केवल ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। कई देश बढ़ती ईंधन कीमतों से निपटने के लिए कदम उठा रहे हैं।
भारत ने हाल ही में श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम की आपूर्ति की, जिसमें 20,000 टन डीजल और 18,000 टन पेट्रोल शामिल है, ताकि वहां आपूर्ति में आई बाधाओं को दूर किया जा सके।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य “मित्र देशों” जैसे चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के लिए खुला है।
ऊर्जा बचाने के लिए देशों के कदम
कई देश ईंधन की खपत कम करने के लिए नए उपाय लागू कर रहे हैं।
मिस्र ने व्यवसायों को जल्दी बंद करने का आदेश दिया है और रिमोट वर्क को बढ़ावा दिया है। इथियोपिया ने गैर-जरूरी कर्मचारियों को अवकाश देकर यात्रा कम करने को कहा है।
फिलीपींस में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया है। वहां परिवहन कर्मियों के लिए सब्सिडी दी जा रही है, फेरी सेवाओं में कमी की गई है और सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है।
