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इज़राइल ने 2026 का बजट पास किया, सैन्य खर्च में बढ़ोतरी
इज़राइल ने रक्षा पर केंद्रित 2026 का बजट पारित कर दिया है। इससे समय से पहले चुनाव टल गए हैं, लेकिन बढ़ते बजट घाटे और महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

इज़राइल की संसद ने सोमवार तड़के 2026 का बजट पास कर दिया। इस फैसले से सैन्य खर्च में बड़ा इजाफा हुआ है। साथ ही इससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को समय से पहले चुनाव से बचने में मदद मिली है।

सांसदों ने बजट को 62 वोट के समर्थन और 55 वोट के विरोध के साथ मंजूरी दी।

जारी संघर्ष के बीच रक्षा खर्च में बढ़ोतरी

कुल बजट 699 अरब शेकेल का है, जिसमें बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर केंद्रित है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। इज़राइल कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है, जिसमें लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ झड़पें भी शामिल हैं।

यह युद्ध देश को हर सप्ताह लगभग 1.6 अरब डॉलर का खर्च करा रहा है।

संसद ने बयान में कहा, “अपडेटेड बजट के तहत और ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ को ध्यान में रखते हुए, रक्षा मंत्रालय के बजट में 30 अरब शेकेल (करीब 10 अरब डॉलर) से अधिक जोड़े गए हैं, जिससे यह बढ़कर 142 अरब शेकेल से अधिक हो गया है।”

बजट पास होने से टला राजनीतिक संकट

सरकार के लिए बजट पास करना जरूरी था, क्योंकि ऐसा न होने पर 90 दिनों के भीतर मध्यावधि चुनाव कराने पड़ते। हालिया जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, यदि समय से पहले चुनाव होते तो नेतन्याहू को हार का सामना करना पड़ सकता था।

अब अगले चुनाव इसी साल के अंत में होने की संभावना है, जो अक्टूबर में हो सकते हैं। हालांकि नेतन्याहू ने कहा है कि संघर्ष की स्थिति के अनुसार चुनाव सितंबर में भी कराए जा सकते हैं।

आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा

बजट पास होने से इज़राइल के वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता कम हुई है। अब तक देश 2025 के अस्थायी बजट पर चल रहा था। साथ ही बढ़ते रक्षा खर्च से आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। सरकार ने सैन्य खर्च में अतिरिक्त 32 अरब शेकेल और जोड़ दिए हैं।

इसके चलते बजट घाटे का लक्ष्य देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 5% तक बढ़ गया है।

महंगाई और वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंता

बढ़ते घाटे ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों को आशंका है कि सरकार के लिए वित्तीय संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। यह स्थिति निकट भविष्य में ब्याज दरों में और कटौती की संभावनाओं को भी सीमित कर सकती है।