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रूस के कड़े नियंत्रण के बीच मॉस्को में बड़े पैमाने पर इंटरनेट बंदी
मॉस्को में व्यापक इंटरनेट बाधा देखी जा रही है, जिससे दैनिक जीवन, व्यवसाय और संचार प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि अधिकारी डिजिटल पहुंच पर नियंत्रण कड़ा कर रहे हैं।

रूस की राजधानी मॉस्को इस समय बड़े पैमाने पर इंटरनेट बंदी का सामना कर रही है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। अधिकारियों द्वारा ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिनसे लोगों की वैश्विक इंटरनेट तक पहुंच सीमित होती दिखाई दे रही है।

निवासी धीमे या बिल्कुल काम न करने वाले इंटरनेट कनेक्शन से जूझ रहे हैं। वेबसाइट खोलने या ऑनलाइन भुगतान करने के दौरान लगातार बफरिंग की समस्या सामने आ रही है। इसके परिणामस्वरूप व्यवसायों को अरबों रूबल का भारी नुकसान हो रहा है, जबकि सार्वजनिक सेवाएं भी बाधित हो रही हैं।

रोसकोमनादज़ोर के आंकड़ों के अनुसार, 5 मार्च से मध्य मॉस्को में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थिर बनी हुई हैं। पिछले महीने की तुलना में दैनिक इंटरनेट ट्रैफिक में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

इसी दौरान, स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार वॉकी-टॉकी, पेजर और लैंडलाइन फोन जैसे पारंपरिक संचार साधनों की बिक्री में तेज़ बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि लोग विकल्प तलाश रहे हैं।

पारंपरिक तरीकों की ओर वापसी

इंटरनेट की अनिश्चितता के कारण कई लोग रोजमर्रा के कामों के लिए पुराने तरीकों की ओर लौट रहे हैं। ऑनलाइन मैप्स की सुविधा न होने पर लोग अब रास्ता पूछने के लिए अजनबियों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।

अधिकारियों ने लोगों को डिजिटल भुगतान के बजाय नकद पैसा साथ रखने की सलाह दी है। साथ ही, मोबाइल ऐप्स के बजाय सीधे फोन करके टैक्सी बुलाने को कहा गया है। ये बदलाव लोगों की जिंदगी को कई दशकों पीछे ले जा रहे हैं।

इस स्थिति के बीच, स्टेट ड्यूमा के एक सदस्य ने “इंटरनेट एक्सेस वाले पेफोन” स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, एक सरकारी समाचार एजेंसी ने स्थानीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के हवाले से कहा कि “ऑनलाइन मैप्स के बजाय तारों के सहारे दिशा तय करना भी संभव है।”

रूस ने ईरान जैसे उपाय अपनाए

रूस अब ईरान जैसे मॉडल पर चलता दिख रहा है, जहां अशांति के दौरान पहले भी इंटरनेट बंद किया गया है।

इस साल की शुरुआत में, जनवरी में विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरान ने इंटरनेट उपयोग पर पाबंदी लगाई थी। उसने वर्षों में विकसित अपने अलग आंतरिक नेटवर्क का सहारा लिया। विशेष “व्हाइट सिम कार्ड” के जरिए सरकारी अधिकारियों और चुनिंदा लोगों को वैश्विक कनेक्टिविटी मिली, जबकि आम नागरिकों की पहुंच सीमित रही।

पिछले एक साल में रूस भी ऐसा ही सिस्टम तैयार कर रहा है। अधिकारियों ने उन वेबसाइट्स की सूची बनाई है, जो इंटरनेट बंदी के दौरान भी उपलब्ध रहती हैं। इनमें सरकारी पोर्टल, राज्य-नियंत्रित मीडिया और “मैक्स” जैसे स्थानीय ऐप शामिल हैं, जो सरकार के नियंत्रण में एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है।

क्रेमलिन ने सुरक्षा कारण बताए

क्रेमलिन ने इंटरनेट बाधाओं का बचाव करते हुए कहा है कि यह यूक्रेन की ओर से ड्रोन हमलों के खतरे के जवाब में उठाया गया कदम है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है।

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति कुछ व्यापक संकेत देती है। उनके अनुसार, यह इंटरनेट बंदी एक ऐसे राष्ट्रीय सिस्टम की तैयारी का हिस्सा हो सकती है, जिसका उद्देश्य अशांति के समय सूचना पर नियंत्रण और इंटरनेट पहुंच को सीमित करना है।

डिजिटल नियंत्रण को लेकर बढ़ती चिंताएं

मौजूदा हालात ने रूस में सूचना प्रवाह पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि ऐसे कदम आगे और बढ़ सकते हैं, जिससे संचार और वैश्विक प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल, मॉस्को के लोग बाधित इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां डिजिटल पहुंच अब सुनिश्चित नहीं रह गई है।