राजेश अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि भारत अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर तभी हस्ताक्षर करेगा, जब वाशिंगटन अपनी नई टैरिफ (शुल्क) व्यवस्था को अंतिम रूप दे देगा।
अग्रवाल ने यह बात एक व्यापार डेटा ब्रीफिंग के दौरान कही। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के अधिकारी अभी भी समझौते के विवरण पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम इस समय अमेरिका के साथ विवरण पर बातचीत कर रहे हैं।” उन्होंने जोड़ा कि नई टैरिफ प्रणाली के अंतिम रूप लेने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।
अमेरिकी टैरिफ बदलाव से समझौते में देरी
भारत और अमेरिका ने मार्च में एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना बनाई थी। दोनों पक्ष पिछले महीने पहले चरण के ढांचे को पहले ही अंतिम रूप दे चुके थे।
हालांकि, अमेरिकी व्यापार नीति में बड़े बदलावों के बाद समयसीमा बदल गई। इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस फैसले के बाद पुरानी टैरिफ व्यवस्था समाप्त हो गई।
निर्णय के बाद, अमेरिकी सरकार ने सभी देशों से आयात पर लगभग 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अधिकारियों ने यह शुल्क अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 122 के तहत लगाया और कहा कि यह कदम भुगतान संतुलन (Balance of Payments) से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करने के लिए उठाया गया है। ये अस्थायी टैरिफ लगभग पांच महीनों तक लागू रहेंगे।
अमेरिकी बाजार में लाभ चाह रहा भारत
प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच देना है।
समझौते के पहले चरण के तहत, अमेरिकी बाजार में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर टैरिफ लगभग 18 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद थी, जबकि पहले यह लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
अग्रवाल ने कहा कि भारत समझौते पर तभी हस्ताक्षर करेगा, जब अदालत के फैसले के बाद अमेरिका एक स्पष्ट वैश्विक टैरिफ संरचना बहाल करेगा।
उन्होंने कहा, “अंततः हर देश एक ऐसे पैकेज के हिस्से के रूप में समझौता करता है, जहां उसे अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले तुलनात्मक लाभ (comparative advantage) मिलता है,” जैसा कि प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया।
वार्ताकारों की बैठक स्थगित
भारत और अमेरिका ने पिछले महीने अपने प्रमुख वार्ताकारों के बीच बैठक की योजना बनाई थी, जिसका उद्देश्य समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना था। लेकिन टैरिफ में बदलाव के कारण इस बैठक को अब स्थगित कर दिया गया है। अग्रवाल ने कहा कि मार्च की समयसीमा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले तय की गई थी।
उन्होंने कहा, “समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने थे। जब हमने यह कहा था, तब IEEPA टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया था। अब फैसले के बाद वे टैरिफ मौजूद नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान में लगभग 10 प्रतिशत टैरिफ अनुच्छेद 122 के तहत भुगतान संतुलन से जुड़ी चिंताओं के कारण लगाए जा रहे हैं, जो पांच महीनों तक लागू रहेंगे। हम जो समझौता करेंगे, उसमें अमेरिका के बाजार में भारत को मिलने वाले टैरिफ ढांचे या तुलनात्मक लाभ को दर्शाना जरूरी है।”
भारत वैश्विक व्यापार वार्ताओं का विस्तार कर रहा
भारत कई अन्य व्यापार समझौतों पर भी बातचीत कर रहा है। सरकार वैश्विक व्यापार साझेदारियों का विस्तार करना चाहती है। अधिकारियों के अनुसार, भारत इस समय छह मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत कर रहा है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, पेरू, चिली, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन और इज़राइल शामिल हैं।
अमेरिका ने व्यापार प्रथाओं की जांच शुरू की
इसी बीच, ट्रंप प्रशासन ने अदालत के फैसले के बाद व्यापारिक दबाव बढ़ाने के कदम उठाए हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय (USTR) ने भारत और 15 अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा कथित अनुचित विनिर्माण प्रथाओं की जांच शुरू की है।
यह जांच 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत की जा रही है। यदि अमेरिका को अनुचित प्रथाएं मिलती हैं, तो वह नए टैरिफ लगा सकता है, आयात पर प्रतिबंध लगा सकता है या व्यापारिक रियायतें निलंबित कर सकता है।
