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ईरान ने संयुक्त अमेरिका-इज़राइल हमले के बाद कई खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागीं
संयुक्त अमेरिका-इज़राइल हमले के बाद ईरान ने इज़राइल और कई खाड़ी देशों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे संघर्ष और तेज़ हो गया तथा क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया।

मध्य पूर्व में तनाव उस समय तेजी से बढ़ गया जब ईरान ने इज़राइल, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कतर की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने यह हमले अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले के जवाब में किए, जो सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालयों के पास किया गया था।

दुबई, अबू धाबी और दोहा में धमाकों की आवाज़

मिसाइल लॉन्च के तुरंत बाद दुबई में ज़ोरदार विस्फोट की आवाज़ सुनी गई। अबू धाबी में भी धमाकों से इलाके दहल उठे, जिसकी पुष्टि वहां के दो निवासियों ने की। रिपोर्टों के अनुसार दोहा और रियाद में भी विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं। कतर की वायु रक्षा प्रणाली ने कम से कम एक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया।

अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि अबू धाबी और दोहा में मौजूद अमेरिकी एयरबेस सीधे निशाने पर थे या नहीं। अबू धाबी के अल धफरा एयर बेस से यूएई वायुसेना और अमेरिकी वायुसेना संयुक्त रूप से संचालन करती हैं। एहतियात के तौर पर यूएई ने कुछ समय के लिए अपने हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से बंद कर दिया था।

दोहा में अल उदैद एयर बेस अमेरिकी सेंट्रल कमांड का अग्रिम मुख्यालय है। लगभग 24 हेक्टेयर में फैला यह बेस अमेरिकी सैन्य संसाधनों का प्रमुख केंद्र है।

बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट पर मिसाइल हमला

बहरीन ने पुष्टि की कि द्वीपीय देश में स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय को मिसाइल हमले का निशाना बनाया गया। हालांकि अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी जारी नहीं की। बहरीन के नेशनल कम्युनिकेशन सेंटर ने कहा, “फिफ्थ फ्लीट के सर्विस सेंटर पर मिसाइल हमला हुआ है। विस्तृत जानकारी बाद में दी जाएगी।”

अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट खाड़ी, लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में संचालन की निगरानी करती है। बहरीन से कई अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ संचालित होते हैं, जिनमें एंटी-माइन और लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज़ शामिल हैं।

सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर

रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब में 2,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इनमें से कुछ रियाद से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात हैं, जहां पैट्रियट मिसाइल बैटरी और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम मौजूद हैं। अधिकारियों ने अभी पुष्टि नहीं की है कि रियाद, अबू धाबी या दोहा में अमेरिकी बलों को नुकसान पहुंचा या नहीं।

ट्रंप बोले — कार्रवाई अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए

तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका के समर्थन से इज़राइल ने ईरान के अंदर प्री-एम्प्टिव हमले शुरू किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए की गई।

उन्होंने कहा, “कुछ समय पहले अमेरिकी सेना ने ईरान में बड़े सैन्य अभियान शुरू किए हैं। हमारा उद्देश्य ईरानी शासन से उत्पन्न आसन्न खतरों को खत्म कर अमेरिकी जनता की रक्षा करना है।”

उन्होंने आगे कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे और अमेरिका उसके मिसाइल कार्यक्रम तथा नौसेना को नष्ट करने के लिए कार्रवाई करेगा।

इज़राइल ने सक्रिय की मिसाइल रक्षा प्रणाली

इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने पुष्टि की कि संयुक्त हमले के बाद ईरान से इज़राइल की ओर मिसाइलें दागी गईं। सेना ने तुरंत अपनी रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दीं।

IDF ने सोशल मीडिया पर बताया कि खतरे को रोकने के लिए इंटरसेप्शन सिस्टम सक्रिय हैं और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजकर सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।

ईरान की चेतावनी — अब कोई ‘रेड लाइन’ नहीं

एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी और इज़राइली ठिकाने अब वैध लक्ष्य हैं।

उन्होंने कहा, “इस आक्रामकता के बाद कोई रेड लाइन नहीं बची है। हर विकल्प संभव है, यहां तक कि वे भी जिन पर पहले विचार नहीं किया गया था।”

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इज़राइल ने ऐसा युद्ध शुरू किया है जिसके लंबे और व्यापक परिणाम होंगे, और संयम की अपीलों को “अस्वीकार्य” बताया।

ईरान और इज़राइल के बीच सीधे मिसाइल हमलों का यह आदान-प्रदान हाल के वर्षों में क्षेत्र की सबसे गंभीर सैन्य बढ़ोतरी में से एक माना जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में सभी सैन्य बल हाई अलर्ट पर हैं और स्थिति लगातार विकसित हो रही है।