प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक विवाद पर कड़ी नाराज़गी जताई है, ऐसा सरकारी सूत्रों ने CNN-News18 को बताया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की एक पाठ्यपुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” संबंधी उल्लेख पर आपत्ति जताई।
पीएम ने जवाबदेही तय करने को कहा
सूत्रों के अनुसार, मोदी ने सवाल उठाया कि इतनी कम उम्र के छात्रों के लिए इस तरह की सामग्री को किसने मंजूरी दी। उन्होंने पूछा कि इस प्रक्रिया की निगरानी किसने की। उन्होंने कक्षा 8 के छात्रों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार जैसे विषय से अवगत कराने पर भी चिंता जताई। पीएम मोदी ने स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस अध्याय की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, “दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने और उसकी निष्पक्षता पर दाग लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंहवी ने इस मामले को त्वरित सुनवाई के लिए अदालत के समक्ष रखा।
अदालत ने इस प्रकाशन को गंभीर कदाचार बताया। उसने संबंधित अध्याय वाली पाठ्यपुस्तक की सभी प्रतियों को “जब्त” करने का आदेश दिया। साथ ही एनसीईआरटी के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी और स्कूल शिक्षा सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “हम गहन जांच चाहते हैं। न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में जवाबदेही सुनिश्चित करना मेरा कर्तव्य है; जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
एनसीईआरटी ने मांगी माफी, पुस्तक वापस ली
अदालत की टिप्पणी के बाद एनसीईआरटी ने बिना शर्त माफी मांगी। उसने 24 फरवरी को जारी की गई पुस्तक Exploring Society: India and Beyond, Vol II को वापस लेने की घोषणा की।
प्राधिकरण ने कुछ ही घंटों में इस पुस्तक को आधिकारिक वेबसाइट से हटा दिया। साथ ही इसकी भौतिक प्रतियों का वितरण भी रोक दिया गया। एनसीईआरटी ने कहा कि वह संबंधित पाठ्यपुस्तक के पाठ्यक्रम को दोबारा लिखेगा।
एनसीईआरटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शिक्षा मंत्रालय की तरफ से बिना शर्त और बिना किसी शर्त के माफी की पेशकश की।
इस विवाद ने स्कूल पाठ्यपुस्तकों की निगरानी और शैक्षणिक सामग्री की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
