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भव्य प्रयागराज यात्रा योजना पर विवाद के बाद बीएसएनएल निदेशक को सरकार ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
वरिष्ठ बीएसएनएल निदेशक की भव्य प्रयागराज यात्रा योजना के वायरल होने और व्यापक आलोचना भड़कने के बाद सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया।

सरकार ने बुधवार को भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के निदेशक विवेक बंजाल से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज की उनकी प्रस्तावित यात्रा सार्वजनिक आक्रोश के बाद रद्द कर दी गई, जब यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आई।

सिंधिया ने बताया “अनुचित”

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वरिष्ठ अधिकारी की दो दिवसीय यात्रा के लिए की गई व्यवस्थाओं की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बंजाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

सिंधिया ने कहा, “मैंने स्पष्ट कर दिया है कि यह अनुचित है और स्थापित नियमों व परंपराओं का उल्लंघन है। यह मेरे लिए अस्वीकार्य है। यह चौंकाने वाला है।”

उन्होंने यह भी कहा कि उचित कार्रवाई की जाएगी।

भव्य व्यवस्थाओं से उठा विवाद

विवेक बंजाल 1987 बैच के दूरसंचार सेवा अधिकारी हैं और उन्हें 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वे बीएसएनएल में निदेशक (कंज्यूमर फिक्स्ड एक्सेस – सीएफए) के पद पर कार्यरत हैं।

25–26 फरवरी की उनकी प्रयागराज यात्रा उस समय चर्चा में आई जब 21 बिंदुओं वाली विस्तृत यात्रा सूची ऑनलाइन सामने आई।

दस्तावेज़ के अनुसार, उनके ठहराव के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। लगभग 50 अधिकारियों को उनकी सहायता के लिए नियुक्त किया गया था, जिनमें जूनियर तकनीकी अधिकारी, इंजीनियर, उप-मंडल अभियंता और मंडल अभियंता शामिल थे।

योजना में संगम स्नान तथा हनुमान मंदिर, अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर के दर्शन की व्यवस्था का भी उल्लेख था। निर्देशों में यात्रा के दौरान बंजाल के “आराम प्रबंधन” पर विशेष ध्यान दिया गया था।

दस्तावेज़ में हेयर ऑयल, अंडरवियर, कंघी, टूथपेस्ट, टूथब्रश, शेविंग किट और चप्पलों जैसी व्यक्तिगत वस्तुओं का भी उल्लेख था। रिपोर्ट के अनुसार, आठ स्नान किट तैयार की गई थीं — छह पुरुषों के लिए और दो महिलाओं के लिए। स्नान के बाद की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को भी नियुक्त किया गया था।

सार्वजनिक आलोचना के बाद यात्रा रद्द

यात्रा सूची वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह यात्रा आधिकारिक थी और क्या सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग निजी सुविधा के लिए किया जा रहा था।

निर्धारित तिथि से एक दिन पहले ही यात्रा रद्द कर दी गई।

बीएसएनएल ने बाद में एक बयान जारी कर स्वयं को इस घटना से अलग बताया। कंपनी ने कहा कि यह मामला उसके पेशेवर मानकों और मूल्यों को प्रतिबिंबित नहीं करता।

बयान में कहा गया, “संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की गई है। मौजूदा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए आगे निर्देश जारी किए गए हैं। बीएसएनएल कर्मचारियों को इस संबंध में निर्धारित आचरण नियमों और निर्देशों का पूर्ण पालन करने की याद दिलाई जाती है।”

यह विवाद अब सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों में जवाबदेही और आधिकारिक आचरण नियमों के पालन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।