जापान के अचानक कराए गए निचले सदन (लोअर हाउस) के चुनाव में मतदान समाप्त हो गया है, और शुरुआती अनुमानों में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की बड़ी जीत के संकेत मिल रहे हैं। इस चुनाव परिणाम से उन्हें देश का नेतृत्व करने के लिए एक स्पष्ट और स्थिर जनादेश मिलने की उम्मीद है।
जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने पार्टी की कमान संभालने के महज चार महीने बाद यह चुनाव कराया था। उनका उद्देश्य अपनी नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के लिए जनता का समर्थन हासिल करना था। अनुमानित नतीजे एलडीपी के लिए एक बड़ी वापसी माने जा रहे हैं। इससे पहले, उनके दो पूर्व नेताओं के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों और बढ़ती महंगाई के कारण पार्टी संसदीय बहुमत खो चुकी थी।
एग्जिट पोल में आरामदायक बहुमत के संकेत
एग्जिट पोल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सत्तारूढ़ पार्टी निचले सदन पर अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। सार्वजनिक प्रसारक एनएचके के अनुसार, एलडीपी के 465 सीटों में से 274 से 328 सीटें जीतने की संभावना है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 233 सीटों से काफी अधिक है।
अपनी जूनियर गठबंधन सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी के साथ मिलकर सत्तारूढ़ गठबंधन कुल 302 से 366 सीटें हासिल कर सकता है। इससे संसद में सरकार को मजबूत स्थिरता मिलेगी।
यह चुनाव देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के बीच हुआ। कई लोग इस अनुमानित जीत को ताकाइची के नेतृत्व को मिली शुरुआती सार्वजनिक स्वीकृति के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने पहले कहा था कि यदि उनका गठबंधन साधारण बहुमत हासिल करने में विफल रहता है तो वे पद छोड़ देंगी।
आर्थिक चिंताएँ बरकरार
मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, ताकाइची के सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। आलोचक इस बात पर करीबी नजर रखे हुए हैं कि वे सार्वजनिक वित्त को कैसे संभालती हैं और चीन के साथ तनाव—विशेषकर ताइवान मुद्दे पर—कैसे प्रबंधित करती हैं।
चुनावी अभियान के दौरान उन्होंने बढ़ती महंगाई के दबाव को कम करने के लिए 135 अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश की। उन्होंने दो वर्षों के लिए खाद्य पदार्थों पर 8 प्रतिशत उपभोग कर (कंजम्पशन टैक्स) निलंबित करने का भी वादा किया। इस फैसले से सरकार के वार्षिक राजस्व में लगभग ¥5 ट्रिलियन की कमी आने की उम्मीद है।
उनकी खर्च योजनाओं से वित्तीय बाजारों में चिंता देखी गई और मुद्रा में उतार-चढ़ाव आया। कई आलोचकों ने इस रणनीति पर सवाल उठाए, क्योंकि जापान का सार्वजनिक कर्ज उसकी जीडीपी से दोगुना से भी अधिक है, जो विकसित देशों में सबसे अधिक है।
विदेश नीति पर रुख चर्चा में
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर, ताइवान को लेकर ताकाइची की पिछली टिप्पणियों से चीन के साथ तनाव बढ़ा। पिछले साल उन्होंने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान सैन्य रूप से शामिल हो सकता है। इस बयान पर बीजिंग की कड़ी प्रतिक्रिया आई थी।
इसके बाद चीन ने जापान में पर्यटन और अध्ययन को हतोत्साहित करने वाली एडवाइजरी जारी की। इस कदम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रभावित हुआ और दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी “पांडा कूटनीति” प्रभावी रूप से समाप्त हो गई।
हालांकि, उनका सख्त रुख जापान के कई मतदाताओं को पसंद आया है और माना जा रहा है कि इसी वजह से एलडीपी को अनुमानित भारी जीत हासिल करने में मदद मिली।
