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महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों की 893 वार्डों में कुल 2,869 सीटों के लिए मतदान जारी
15 जनवरी से महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव शुरू हो गए हैं। लगभग 2,900 सीटों के लिए मतदान जारी है, जिसमें मुंबई की बीएमसी पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित है।

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिन्हें राज्यभर में राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। 29 नगर निगमों की 893 वार्डों में कुल 2,869 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इनमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) जैसे बड़े नगर निकाय भी शामिल हैं।

इन चुनावों में 15,931 उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य दांव पर है। इनमें से करीब 1,700 उम्मीदवार मुंबई में, जबकि 1,166 उम्मीदवार पुणे में चुनावी मैदान में हैं। इस चरण में कुल 3.48 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं।

प्रमुख शहर और नगर निकाय केंद्र में

कई अहम नगर निगमों में मतदान हो रहा है। इनमें मुंबई, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, कल्याण-डोंबिवली, वसई-विरार, ठाणे, नागपुर, सोलापुर, कोल्हापुर, अमरावती और परभणी शामिल हैं।

इन सभी मुकाबलों में बीएमसी चुनाव को उसके राजनीतिक महत्व और लंबे इतिहास के कारण खास तौर पर देखा जा रहा है।

मतदान कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्था

मतदान 15 जनवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ और शाम 5:30 बजे तक चलेगा। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

केवल मुंबई में ही 25,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसमें कानून-व्यवस्था की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।

बीएमसी की तैयारियां: मतगणना केंद्र और मतदान केंद्र

बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने बताया कि मुंबई भर के 23 विभागीय केंद्रों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और अन्य चुनाव सामग्री वितरित की गई है।

नगर निकाय ने यह भी कहा कि प्रत्येक मतगणना केंद्र में चुनाव सामग्री के सुरक्षित भंडारण के लिए स्ट्रॉन्ग रूम बनाए गए हैं। मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए सजे हुए मतदान केंद्र, पिंक बूथ, सेल्फी पॉइंट और समर्पित मीडिया सुविधा केंद्र जैसे कई पहल की गई हैं।

मुंबई की लड़ाई पर सबसे ज्यादा नजर

बीएमसी के लिए मुकाबला एक कड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है। भाजपा-नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को एकजुट हुए ठाकरे चचेरे भाइयों से कड़ी चुनौती मिल रही है। राज ठाकरे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख हैं।

इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), एनसीपी (एसपी), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी चुनावी मैदान में हैं।

लगातार 26 वर्षों तक अविभाजित शिवसेना का बीएमसी पर नियंत्रण रहा। पिछले नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने 82 सीटें जीती थीं, जबकि 2017 में शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं।

मंगलवार को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। अंतिम दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर नगर निगम चुनाव के लिए रोड शो किया।

बीएमसी चुनाव में नागरिक मुद्दे हावी

बीएमसी चुनाव में स्थानीय नागरिक समस्याएं मुख्य मुद्दा बनी हुई हैं। इनमें मानसून के दौरान बार-बार जलभराव, बढ़ती यातायात भीड़ और सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ता दबाव शामिल है।

अन्य चिंताओं में गड्ढों से भरी सड़कें, मुंबई में गिरती वायु गुणवत्ता और बसों व लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ शामिल हैं।

राजनीतिक समीकरण और गठबंधन

इन नगर निकाय चुनावों में अहम राजनीतिक गठबंधनों की भी भूमिका रही है। ठाकरे चचेरे भाई करीब दो दशक बाद फिर साथ आए हैं। उनका विभाजन 2005 में हुआ था।

पश्चिमी महाराष्ट्र में अजित पवार ने अपने चाचा की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के साथ पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और परभणी जैसे प्रमुख नगर निकायों के लिए गठबंधन किया है।

मतदाताओं को लुभाने वाले वादे

राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार के दौरान कई मतदाता-केंद्रित वादे किए हैं। महायुति गठबंधन ने बेस्ट बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं को 50 प्रतिशत रियायत देने का वादा किया है।

वहीं, शिवसेना (यूबीटी)–मनसे गठबंधन ने महिला घरेलू कामगारों को ₹1,500 मासिक भत्ता देने का वादा किया है।