ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शन लगातार देश को हिला रहे हैं और मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका स्थित ईरानी मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुमानों के अनुसार, पिछले 14 दिनों में कम से कम 78 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। ईरानी अधिकारियों की ओर से अब तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
HRANA ने कहा कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद से हालात लगातार बिगड़ते गए हैं। ये प्रदर्शन पूरे देश में फैल चुके हैं और इनके थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
प्रदर्शन शुरू होने से अब तक 100 से अधिक मौतें
शनिवार को जारी एक बयान में HRANA ने कहा कि अशांति शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है। इस आंकड़े में सुरक्षा बलों के 38 सदस्य भी शामिल हैं। संगठन ने यह भी बताया कि मारे गए प्रदर्शनकारियों में से कम से कम सात की उम्र 18 वर्ष से कम थी।
मौतों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां भी हुई हैं। HRANA के अनुसार, देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 2,638 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
सभी प्रांतों में फैले प्रदर्शन
प्रदर्शन देश के लगभग हर हिस्से तक पहुंच चुके हैं। HRANA ने कहा कि सैकड़ों स्थानों पर प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं।
शनिवार के बयान में संगठन ने कहा, “चौदहवें दिन के अंत तक एकत्रित आंकड़ों के आधार पर, देश के सभी 31 प्रांतों के 185 शहरों में 574 प्रदर्शन स्थलों की पहचान की गई है।”
समूह ने स्पष्ट किया कि यह संख्या संचयी है और इसमें 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद से पहचाने गए सभी प्रदर्शन स्थल शामिल हैं।
मौतों के कारणों पर चिंता
HRANA ने कहा कि मौतों की समीक्षा से यह संकेत मिलता है कि अधिकारियों ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया।
HRANA की विज्ञप्ति में कहा गया, “मौतों के कारणों की जांच से पता चलता है कि अधिकांश पीड़ितों को जीवित गोलियों या पेलेट गन की फायरिंग से, अधिकतर नजदीकी दूरी से, मारा गया।”
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं। इससे पहले, एक गवाह ने CNN को बताया था कि शुक्रवार को हुए एक प्रदर्शन के दौरान ईरानी सुरक्षा बलों ने उसके एक रिश्तेदार को पेलेट से मारा।
इंटरनेट ब्लैकआउट जारी
ईरानी सरकार ने देशभर में संचार पर पाबंदियां जारी रखी हैं। गुरुवार शाम से शुरू हुआ इंटरनेट ब्लैकआउट जारी रहा, जबकि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें तेज होती गईं।
तेहरान और कई अन्य बड़े शहरों में प्रदर्शन शुरू होने के तुरंत बाद अधिकारियों ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं काट दीं। इन उपायों के बावजूद, ईरान के भीतर से वीडियो ऑनलाइन सामने आते रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसक दमन के दौरान ऐसे ब्लैकआउट अक्सर इस्तेमाल किए जाते हैं।
साइबर सुरक्षा निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के निदेशक अल्प टोकर ने इस सप्ताह CNN से कहा, “जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल की आशंका होती है, तो राष्ट्रीय स्तर पर ब्लैकआउट शासन की आम रणनीति बन जाती है। इसका उद्देश्य जमीनी हालात की खबरों को फैलने से रोकना और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को सीमित करना होता है।”
आर्थिक संकट से बढ़ा जनआक्रोश
इन प्रदर्शनों की बड़ी वजह आर्थिक संकट है। कई ईरानी गंभीर महंगाई और गिरती मुद्रा के कारण भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
वर्षों से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है। हाल ही में 12 दिनों तक चले ईरान–इज़रायल युद्ध ने देश की वित्तीय स्थिति को और नुकसान पहुंचाया। इस संघर्ष में अमेरिका के हमले भी शामिल थे, जिससे पहले से नाजुक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
इन सभी कारणों ने मिलकर जनता में असंतोष को गहरा किया है और जारी अशांति को हवा दी है।
