पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेज़ुएला से जुड़े तेल टैंकर मैरिनेरा को जब्त किया। यह कार्रवाई अटलांटिक महासागर में दो सप्ताह से अधिक चले पीछा अभियान के बाद हुई। इसके साथ ही, प्रतिबंधित तेल शिपमेंट के खिलाफ अमेरिका का अभियान तेज़ हो गया।
शुरुआत में, टैंकर का नाम बेला-1 था। बाद में, इसका नाम बदला गया। फिर, इसे रूसी रजिस्ट्रेशन के तहत दोबारा दर्ज किया गया। इसके बाद, जहाज़ ने प्रतिबंधित टैंकरों की समुद्री नाकाबंदी से बचने की कोशिश की। साथ ही, इसने अमेरिकी कोस्ट गार्ड को जहाज़ पर चढ़ने से बार-बार रोका। नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लंबा पीछा करना पड़ा।
इसके बाद, अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने टैंकर को जब्त किया। इस दौरान, अमेरिकी सेना ने समर्थन दिया। इसी बीच, आसपास रूसी नौसैनिक गतिविधियाँ भी देखी गईं। इनमें एक रूसी पनडुब्बी भी शामिल थी।
मैरिनेरा को क्यों निशाना बनाया गया
अब सवाल उठता है कि मैरिनेरा को क्यों निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह टैंकर वेनेज़ुएला से जुड़े तेल शिपमेंट का हिस्सा था। साथ ही, यह नाम बदलकर और पुनः पंजीकरण कर प्रतिबंधों से बच रहा था। इसलिए, अमेरिका ने कार्रवाई की।
वेनेज़ुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध
इससे पहले, वॉशिंगटन ने वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका का आरोप है कि मादुरो सरकार अवैध तेल निर्यात से धन जुटाती है। इसके बाद, हाल के हफ्तों में अमेरिका ने कई वेनेज़ुएला-संबंधित टैंकर रोके हैं। नतीजतन, समुद्री नाकाबंदी और सख़्त हो गई है।
रूस की आपत्ति और कूटनीतिक तनाव
हालाँकि, रूसी रजिस्ट्रेशन ने मामले को और संवेदनशील बना दिया। रूस ने वेनेज़ुएला के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंध मज़बूत किए हैं। साथ ही, मॉस्को अमेरिकी प्रतिबंधों को अवैध बताता रहा है। इसलिए, उसने रूसी झंडे वाले जहाज़ों में हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी है।
कैरेबियन में एम/टी सोफिया की जब्ती
इसी बीच, अमेरिका ने एक अलग कार्रवाई की। इस बार, उसने एम/टी सोफिया टैंकर को पकड़ा। यह जहाज़ कैरेबियन सागर में था। इसके पास कोई राष्ट्रीयता नहीं थी। इसलिए, अधिकारियों ने इसे “डार्क फ्लीट” टैंकर बताया।
ऑपरेशन सदर्न स्पीयर
इसके बाद, तड़के सुबह यह ऑपरेशन किया गया। इसमें डिपार्टमेंट ऑफ वॉर और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी शामिल थे। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि जहाज़ अवैध गतिविधियों में लिप्त था। अब, अमेरिकी कोस्ट गार्ड इसे अमेरिका ले जा रहा है।
आगे क्या होगा
आखिर में, इन दोनों जब्तियों से अमेरिकी समुद्री प्रवर्तन का दायरा बढ़ता दिख रहा है। अब, कार्रवाई वेनेज़ुएला से दूर जलक्षेत्रों तक पहुँच गई है। आगे चलकर, कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि टैंकरों का क्या होगा। साथ ही, जुड़े लोगों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई हो सकती है।
