बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर एक और हिंसक घटना ने नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सोमवार शाम दक्षिण-पश्चिमी बांग्लादेश में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक हिंदू व्यवसायी की गोली मारकर हत्या कर दी।
मृतक की पहचान 45 वर्षीय राणा प्रताप के रूप में हुई है। वह एक फैक्ट्री के मालिक थे और साथ ही एक अख़बार में कार्यवाहक संपादक के रूप में भी काम कर रहे थे। हमलावरों ने उन्हें सिर में गोली मारी।
जशोर ज़िले में गोलीबारी की घटना
अधिकारियों के हवाले से एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह गोलीबारी शाम करीब 6 बजे हुई। यह घटना जशोर ज़िले के मणिरामपुर उपज़िला स्थित कोपालिया बाज़ार इलाके में हुई।
हमले के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया।
बाज़ार क्षेत्र में चलाते थे आइस फैक्ट्री
मणोहरपुर यूनियन परिषद के अध्यक्ष अख्तर फारूक मिंटू के अनुसार, प्रताप पास के केशबपुर उपज़िला के अरुआ गांव के एक स्कूल शिक्षक के बेटे थे।
पिछले दो वर्षों से प्रताप कोपालिया बाज़ार में एक आइस फैक्ट्री चला रहे थे। मिंटू के हवाले से एनडीटीवी ने कहा, “कुछ लोग उन्हें आइस फैक्ट्री से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए और गोली मार दी।”
मोटरसाइकिल पर आए थे हमलावर
प्रत्यक्षदर्शियों ने हमले की घटनाक्रम का विवरण दिया। एक स्थानीय निवासी रिपन हुसैन ने बताया कि हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए थे।
उन्होंने कहा, “उनका प्रताप के साथ विवाद हुआ, फिर उन्होंने उसके सिर पर कई गोलियां चलाईं और फरार हो गए।” बाद में पुलिस ने प्रताप के शव के पास से सात खोखे बरामद किए।
पिछले कानूनी मामलों का उल्लेख
एनडीटीवी के अनुसार, स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया गया कि प्रताप के खिलाफ जशोर के विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज थे। इसके अलावा, रिपोर्ट में एक चरमपंथी समूह से उनके कथित संबंधों का भी उल्लेख किया गया।
अपने व्यवसाय के अलावा, प्रताप नरैल ज़िले से प्रकाशित दैनिक बीडी खोबर के कार्यवाहक संपादक के रूप में भी कार्यरत थे।
अख़बार के सहयोगी ने जताई अनिश्चितता
इस बीच, बीडी खोबर के समाचार संपादक अबुल कासेम ने अख़बार में प्रताप की भूमिका की पुष्टि की, लेकिन हत्या के कारण को लेकर अनिश्चितता जताई।
उन्होंने कहा, “राणा प्रताप हमारे कार्यवाहक संपादक थे। हालांकि एक समय उनके खिलाफ मामले थे, लेकिन उन सभी में उन्हें बरी कर दिया गया था। मैं नहीं कह सकता कि इस हत्या के पीछे क्या वजह रही।”
राजनीतिक नेता के आरोप
इसी दौरान, केशबपुर में बीएनपी की सुफलकाटी यूनियन इकाई के महासचिव जहांगीर आलम ने प्रताप की पृष्ठभूमि को लेकर आरोप लगाए।
एनडीटीवी के हवाले से उन्होंने कहा, “कोपालिया में उनकी आइस फैक्ट्री थी और उसी इलाके में उनकी हत्या हुई। वह कई विवादों में शामिल थे।” एनडीटीवी ने आगे आलम के हवाले से यह भी कहा, “वह कोपालिया इलाके में खुले तौर पर घूमते थे और अपने मूल गांव में नहीं रहते थे।”
पुलिस ने जांच शुरू की
हत्या के बाद पुलिस ने पुष्टि की कि जांच शुरू कर दी गई है। मणिरामपुर थाना प्रभारी (ओसी) रज़िउल्लाह खान ने कार्रवाई की जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “सूचना मिलने के बाद हम मौके पर पहुंचे। शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए मुर्दाघर भेज दिया गया है। हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि इसमें कौन लोग शामिल थे।”
अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर सवाल
गौरतलब है कि प्रताप की हत्या ऐसे समय में हुई है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। यह घटना दिसंबर से अब तक एक हिंदू विधवा के साथ दुष्कर्म और कम से कम तीन हिंदू पुरुषों की हत्या के बाद सामने आई है।
इसके परिणामस्वरूप, आलोचकों ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे हमलों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
