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सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान 18 साल बाद सुरक्षा और परमाणु समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका का दौरा करेंगे
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान तेल, सुरक्षा, एआई और परमाणु ऊर्जा पर समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका का दौरा करेंगे।

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मंगलवार को संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा करेंगे। दोनों देश तेल और सुरक्षा के क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। वे व्यापार, तकनीक और संभवतः परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने की भी योजना बना रहे हैं।

यह सलमान की 18 वर्षों में पहली अमेरिका यात्रा होगी। 2018 में इस्तांबुल में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। बाद में वॉशिंगटन ने निष्कर्ष निकाला कि इस ऑपरेशन को मंजूरी मोहम्मद बिन सलमान ने ही दी थी।

ट्रंप की पिछली यात्रा पर आगे बढ़ता संबंध

यह यात्रा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस वर्ष की शुरुआत में सऊदी अरब यात्रा के बाद बने सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाती है। उस दौरान ट्रंप ने रियाद से 600 अरब डॉलर के निवेश वादे की घोषणा की थी। अब सलमान बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ठोस सुरक्षा गारंटी चाहते हैं। वे उन्नत AI तकनीक और नागरिक परमाणु कार्यक्रम पर भी प्रगति चाहते हैं।

सोमवार को ट्रंप ने पुष्टि की कि वह सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमान बेचने की मंजूरी देने की योजना रखते हैं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि हम यह करने जा रहे हैं।”

तेल, रक्षा और तकनीक प्रमुख मुद्दे

अमेरिका और सऊदी अरब लंबे समय से एक-दूसरे पर निर्भर रहे हैं। रियाद ने स्थिर तेल कीमतों की गारंटी दी। बदले में वॉशिंगटन ने सुरक्षा प्रदान की।

यह संतुलन 2019 में बदल गया, जब ईरान ने सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हमले किए और अमेरिका ने जवाब नहीं दिया। तनाव एक बार फिर सितंबर में बढ़ गया, जब इज़राइल ने दोहा, क़तर में हमला किया, जिसे उसने हमास सदस्यों को निशाना बनाने वाला ऑपरेशन बताया।

उस हमले के बाद ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए क़तर के साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। कई विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब को भी इसी तरह की डील मिल सकती है।

परमाणु और AI सहयोग को लेकर रियाद की कोशिश

सऊदी अरब परमाणु ऊर्जा और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस में गहरी साझेदारी चाहता है। यह प्रयास उसके विज़न 2030 कार्यक्रम को समर्थन देते हैं, जिसका लक्ष्य अर्थव्यवस्था में विविधता लाना और क्षेत्र में साम्राज्य की स्थिति मजबूत करना है।

मोहम्मद बिन सलमान नागरिक परमाणु कार्यक्रम पर एक सौदा भी चाहते हैं। ऐसी किसी सहमति से रियाद को अमेरिकी परमाणु तकनीक और मजबूत सुरक्षा गारंटी मिलेगी। इससे सऊदी अरब UAE की बराबरी कर सकेगा, जिसके पास पहले से ही परमाणु कार्यक्रम है, और ईरान का मुकाबला कर सकेगा।

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