अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करने वाले सामानों पर वैश्विक शुल्क दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय “तुरंत प्रभाव से” लागू होगा।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके व्यापक टैरिफ कार्यक्रम के बड़े हिस्से को रद्द किए जाने के ठीक एक दिन बाद आया।
अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने शुक्रवार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे “असाधारण रूप से अमेरिका-विरोधी निर्णय” बताया। उन्होंने कहा कि निर्णय की समीक्षा के बाद उनका प्रशासन आयात शुल्क को “पूरी तरह अनुमत और कानूनी रूप से परखा हुआ 15% स्तर” तक बढ़ाएगा।
अदालत ने 1977 के कानून के इस्तेमाल को खारिज किया
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने छह-तीन के बहुमत से ट्रंप द्वारा 1977 के एक कानून का उपयोग कर अलग-अलग देशों पर अचानक टैरिफ लगाने के कदम को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता।
यह कानून ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) है। ट्रंप ने इसी के आधार पर व्यापक टैरिफ लगाए थे, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ था।
न्यायाधीशों ने कहा कि यह कानून “राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “यदि कांग्रेस का उद्देश्य इस कानून के माध्यम से टैरिफ लगाने की विशिष्ट और असाधारण शक्ति प्रदान करना होता, तो वह इसे स्पष्ट रूप से व्यक्त करती, जैसा कि उसने अन्य टैरिफ कानूनों में लगातार किया है।”
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत के फैसले में लिखा, “IEEPA में टैरिफ या शुल्क का कोई उल्लेख नहीं है।”
ट्रंप का अदालत पर पलटवार
ट्रंप ने फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उल्लेखनीय है कि जिन न्यायाधीशों ने उनके खिलाफ मतदान किया, उनमें से दो को उन्होंने ही नामित किया था। उन्होंने बिना किसी सबूत के अदालत पर विदेशी प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया।
ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “मैं अदालत के कुछ सदस्यों से शर्मिंदा हूं, बिल्कुल शर्मिंदा, क्योंकि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने का साहस नहीं था।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस निर्णय से उनकी शक्ति कम नहीं हुई है। ट्रंप ने कहा, “हमारे देश की रक्षा के लिए, एक राष्ट्रपति वास्तव में पहले से अधिक टैरिफ लगा सकता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह फैसला उन्हें “और अधिक शक्तिशाली” बनाता है।
ट्रेजरी ने वैकल्पिक योजना का बचाव किया
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने डलास के इकोनॉमिक क्लब को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन के पास टैरिफ स्तर बनाए रखने के लिए एक अन्य कानूनी रास्ता है। उन्होंने कहा कि यह वैकल्पिक तरीका “2026 में लगभग समान टैरिफ राजस्व सुनिश्चित करेगा।”
महत्वपूर्ण रूप से, अदालत के फैसले का प्रभाव उन क्षेत्र-विशिष्ट टैरिफ पर नहीं पड़ा जो ट्रंप ने अलग से लगाए थे। इनमें इस्पात, एल्युमीनियम और अन्य वस्तुओं पर शुल्क शामिल हैं। इसके अलावा, चल रही सरकारी जांचें भविष्य में और अधिक क्षेत्र-आधारित टैरिफ का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।
राजनीतिक और बाज़ार प्रतिक्रिया
यह फैसला व्हाइट हाउस में वापसी के 13 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप की सबसे बड़ी हार माना जा रहा है। इससे पहले कई मामलों में अदालत ने राष्ट्रपति की शक्तियों का विस्तार किया था, लेकिन इस बार स्पष्ट सीमाएं तय की गईं।
वित्तीय बाजारों ने शांत प्रतिक्रिया दी। वॉल स्ट्रीट में शेयरों में हल्की बढ़त देखी गई, क्योंकि कई निवेशकों को इस फैसले की पहले से उम्मीद थी।
व्यापारिक समूहों ने इस निर्णय का स्वागत किया। नेशनल रिटेल फेडरेशन ने कहा कि यह फैसला उन कंपनियों के लिए “बहुत जरूरी स्थिरता” प्रदान करता है, जो स्थिर व्यापार नियमों पर निर्भर हैं।
कुल मिलाकर, अदालत के इस फैसले ने ट्रंप की व्यापार नीति के सामने नई कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं, टैरिफ बढ़ाने का उनका कदम दर्शाता है कि वे अपनी आर्थिक रणनीति में व्यापार उपायों को केंद्रीय भूमिका में बनाए रखने के इरादे रखते हैं
