प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, यूनाइटेड स्टेट्स सदर्न कमांड ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसने एक नामित आतंकी संगठन से जुड़े पोत पर घातक हमला किया। कमांड ने इस अभियान की घोषणा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए की और हमले का एक छोटा वीडियो भी साझा किया।
हमले का विवरण
सदर्न कमांड (साउथकॉम) के अनुसार, यह कार्रवाई पूर्वी प्रशांत महासागर में संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करी में शामिल एक नाव को निशाना बनाकर की गई। इस हमले में तीन व्यक्तियों की मौत हुई, जिन्हें “नार्को-आतंकवादी” बताया गया। यह अभियान साउथकॉम के कमांडर जनरल फ्रांसिस एल. डोनोवन के निर्देश पर चलाया गया।
साउथकॉम ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “20 फरवरी को #SOUTHCOM कमांडर जनरल फ्रांसिस एल. डोनोवन के निर्देश पर जॉइंट टास्क फोर्स सदर्न स्पीयर ने नामित आतंकी संगठनों द्वारा संचालित एक पोत पर घातक काइनेटिक स्ट्राइक की। खुफिया जानकारी ने पुष्टि की कि यह पोत पूर्वी प्रशांत में ज्ञात नार्को-तस्करी मार्गों से गुजर रहा था और मादक पदार्थ तस्करी गतिविधियों में संलिप्त था। इस कार्रवाई में तीन पुरुष नार्को-आतंकवादी मारे गए। किसी भी अमेरिकी सैन्य बल को नुकसान नहीं पहुंचा।”
कमांड द्वारा जारी 16 सेकंड के वीडियो में हमले का क्षण दिखाया गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पोत किस आतंकी संगठन द्वारा संचालित किया जा रहा था।
On Feb. 20, at the direction of #SOUTHCOM commander Gen. Francis L. Donovan, Joint Task Force Southern Spear conducted a lethal kinetic strike on a vessel operated by Designated Terrorist Organizations. Intelligence confirmed the vessel was transiting along known… pic.twitter.com/PzWQFfNgHm
— U.S. Southern Command (@Southcom) February 21, 2026
किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं
साउथकॉम ने जोर देकर कहा कि इस मिशन के दौरान कोई भी अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुआ। कमांड ने इसे खुफिया जानकारी के आधार पर की गई लक्षित कार्रवाई बताया, जिसमें पोत को स्थापित मादक पदार्थ तस्करी मार्गों पर ट्रैक किया गया था।
क्षेत्र में अमेरिका के व्यापक अभियान
2 सितंबर से अब तक अमेरिकी सेना कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में कम से कम 43 हमले कर चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन अभियानों में 147 से अधिक कथित “नार्को-आतंकवादी” मारे गए हैं।
अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य मादक पदार्थ तस्करी में शामिल पोतों को नष्ट करना और क्षेत्र में नशीले पदार्थों के प्रवाह को कम करना है।
हालांकि, कई विशेषज्ञों का तर्क है कि इस प्रकार के सैन्य हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर सकते हैं। आलोचकों ने सवाल उठाया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बल प्रयोग कानूनी रूप से कितना उचित है।
इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने मादक पदार्थ तस्करी में शामिल होने के संदेह में तीन और नावों को नष्ट किया। इनमें से दो पोत पूर्वी प्रशांत में और एक कैरिबियन में स्थित था। अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में 11 कथित नार्को-आतंकवादी मारे गए। शुक्रवार की कार्रवाई की तरह, इनमें भी किसी अमेरिकी कर्मी के घायल होने की सूचना नहीं थी।
