पाकिस्तान को अपने जल संसाधनों पर और अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि भारत ने रावी नदी के अतिरिक्त पानी के प्रवाह को रोकने की योजना बनाई है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान पहले ही सिंधु जल संधि के निलंबन से जूझ रहा है।
यह बदलाव जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी बांध परियोजना के लगभग पूरा होने से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 31 मार्च तक तैयार हो सकती है।
कई वर्षों तक भंडारण क्षमता की कमी के कारण रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में बहता रहा। लेकिन अप्रैल से यह प्रवाह रुक सकता है, जिससे पाकिस्तान में जल उपलब्धता और कम हो सकती है।
तनाव के बाद परियोजना का बढ़ता महत्व
पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस बांध परियोजना का रणनीतिक महत्व बढ़ गया है। नरेंद्र मोदी ने इस घटना के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया, जबकि इस्लामाबाद ने किसी भी संलिप्तता से इनकार किया।
पिछले वर्ष 22 अप्रैल को हुए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए। इनमें 1960 की जल-बंटवारा संधि का निलंबन भी शामिल था, जिसने दशकों तक दोनों देशों के बीच नदी उपयोग को नियंत्रित किया।
पूरा होने से जल प्रवाह पर असर संभव
शाहपुर कंडी परियोजना भारत के पूर्वी नदियों के जल पर अपने हिस्से का पूर्ण उपयोग करने के इरादे को दर्शाती है। बांध के संचालन में आने के बाद रावी के अतिरिक्त पानी का पाकिस्तान की ओर नियमित प्रवाह बंद हो जाएगा। इससे पाकिस्तान की मौजूदा जल चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के जल संसाधन मंत्री जावेद अहमद राणा ने सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “हाँ, रावी नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान को जाना बंद होगा। इसे बंद होना ही है,” और बताया कि यह परियोजना सूखा प्रभावित कठुआ और सांबा जिलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जब उनसे पाकिस्तान पर संभावित प्रभाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप पाकिस्तान की चिंता क्यों कर रहे हैं? वे सीमांत उपस्थिति हैं। उन्हें अपनी बनाई समस्याओं में ही उलझने दें।”
जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रगति पर
अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद से भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर चार जलविद्युत परियोजनाओं पर काम जारी रखा है। इनके 2027–28 तक शुरू होने की संभावना है।
पूर्वी नदियों पर भारत का कानूनी अधिकार
भारत का कहना है कि शाहपुर कंडी बांध संधि का उल्लंघन नहीं करता, क्योंकि रावी पूर्वी नदियों में से एक है और उस पर भारत को पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
1960 की विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई संधि के तहत छह नदियों का बंटवारा किया गया था। भारत को पूर्वी नदियों — सतलुज, ब्यास और रावी — पर बिना प्रतिबंध अधिकार मिला। पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों — सिंधु, झेलम और चिनाब — पर अधिकार दिया गया।
इसके बावजूद, वर्षों तक पूर्वी नदियों का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में बहता रहा।
चार दशक बाद परियोजना को पुनर्जीवन
करीब चार दशक के अंतराल के बाद प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से शाहपुर कंडी बैराज योजना को पुनर्जीवित किया गया। 6 दिसंबर 2018 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस परियोजना को मंजूरी दी और इसके सिंचाई घटक के लिए 485.38 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की।
परियोजना पूर्ण होने के बाद पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में बड़े क्षेत्र की कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
