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लोकसभा की तीखी बहस में अमित शाह ने कांग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया
अमित शाह ने लोकसभा में चुनावी सुधारों पर हुई बहस के दौरान कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह “बेबुनियाद आरोप” लगा रही है, जबकि अपनी ही लम्बी चुनावी अनियमितताओं के इतिहास को नजरअंदाज कर रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में चुनावी सुधारों पर हुई बहस को कांग्रेस पर कड़े प्रहार में बदल दिया। उन्होंने कांग्रेस पर मतदाता धोखाधड़ी से जुड़े “बेबुनियाद आरोप” फैलाने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि कांग्रेस नेता उन दशकों पुराने चुनावी अनियमितताओं को स्वीकार करने से इंकार कर रहे हैं, जिनके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारें जिम्मेदार थीं।

शाह ने कहा कि विपक्ष “इतिहास की बात करते हैं तो नाराज़ हो जाता है, लेकिन कोई भी देश या समाज इतिहास के बिना आगे नहीं बढ़ सकता।” इसके बाद उन्होंने कई उदाहरण देकर यह दावा किया कि “वोट चोरी” कोई नई बात नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि ये समस्याएं भाजपा के सत्ता में आने से बहुत पहले शुरू हो चुकी थीं।

शाह का दावा: स्वतंत्रता के बाद ही शुरू हुई वोट चोरी

शाह ने आरोप लगाया कि “वोट चोरी” का पहला मामला स्वतंत्रता के तुरंत बाद सामने आया था। उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल को 28 लोगों का समर्थन था, जवाहरलाल नेहरू को दो लोगों का; फिर भी नेहरू पीएम बने, यह वोट चोरी थी।”

इसके बाद शाह ने विपक्ष द्वारा लगातार उठाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजनस (SIR) की आलोचना पर बात की। उन्होंने कहा कि SIR 1952 से नियमित प्रक्रिया रही है, जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। उन्होंने जोड़ा, “पहला SIR 1952 में हुआ… फिर 1957 में हुआ… तीसरा 1961 में हुआ और तब भी नेहरू ही थे।”

शाह ने कहा कि यह प्रक्रिया कई प्रधानमंत्रियों के समय में जारी रही। यह “लाल बहादुर शास्त्री के समय, फिर इंदिरा गांधी के समय, राजीव गांधी के समय, नरसिंह राव के समय, और फिर 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी के समय हुई और मनमोहन सिंह के समय तक चलती रही।”

उन्होंने जोर दिया कि किसी भी राजनीतिक दल ने SIR पर कभी आपत्ति नहीं की क्योंकि “यह चुनावों को स्वच्छ रखने और लोकतंत्र को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया है।”

शाह ने इंदिरा गांधी के आपातकाल काल का विवाद उठाया

इसके बाद शाह ने आपातकाल काल की घटनाओं को “दूसरी वोट चोरी” बताया। उन्होंने कहा, “दूसरी ‘वोट चोरी’ इंदिरा गांधी द्वारा की गई, जब उन्होंने अदालत द्वारा उनकी चुनाव रद्द होने के बाद खुद को संरक्षण दे दिया।”

इसके बाद उन्होंने तीसरी “वोट चोरी” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मामला अब सिविल अदालतों में है। उनके अनुसार, यह विवाद सोनिया गांधी के मतदाता पंजीकरण की समय-सीमा से संबंधित है। उन्होंने कहा, “तीसरी ‘वोट चोरी’ का विवाद अभी सिविल अदालत में पहुँचा है कि सोनिया गांधी भारत की नागरिक बनने से पहले कैसे मतदाता बनीं।”

शाह ने समझाया कि SIR का उद्देश्य बहुत सरल है — “जो लोग मर चुके हैं उन्हें मतदाता सूची से हटाना, जो 18 वर्ष के हो गए हैं उन्हें जोड़ना, और विदेशी नागरिकों को एक-एक कर हटाना।”

चुनावी सुधारों पर बहस जारी

शाह ने ये टिप्पणियाँ लोकसभा में चुनावी सुधारों पर बहस के दूसरे दिन कीं। यह चर्चा विपक्ष के लंबे दबाव के बाद शुरू हुई, जिसने SIR पर व्यापक बहस की मांग की थी। शुरुआत में सरकार इस मांग को लेकर अनिच्छुक थी।

अंततः जब दोनों पक्ष वंदे मातरम् पर बहस पूरी करने के बाद चुनावी सुधारों पर चर्चा करने पर सहमत हुए, तब गतिरोध समाप्त हुआ। इसके बाद संसद ने तय व्यवस्था के तहत आगे की चर्चा शुरू कर दी है।